चंडीगढ़ : हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा की अध्यक्षता में ‘हाई पॉवर परचेज कमेटी’ की महत्वपूर्ण बैठक हुई।इस बैठक में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा भी ऑनलाइन माध्यम से विशेष रूप से जुड़े।
बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी रबी सीजन के दौरान किसानों को गेहूं के उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाणित बीज समय पर उपलब्ध कराना और राज्य के सरकारी विद्यालयों में कृषि विज्ञान व मृदा स्वास्थ्य से जुड़ी प्रयोगात्मक शिक्षा को बढ़ावा देना था।
आगामी गेहूं के बुआई सीजन को ध्यान में रखते हुए कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज बिना किसी देरी के उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में समिति की बैठक के दौरान हरियाणा बीज विकास निगम के प्रमुख बीज प्रसंस्करण केंद्रों—हिसार, टोहाना, पटौदी, यमुनानगर, सिरसा और उमरी (कुरुक्षेत्र)—से राज्य के विभिन्न जिलों और ब्लॉक स्तर के 80 से अधिक वितरण केंद्रों तक प्रमाणित गेहूं बीज पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टरों की माल भाड़ा दरों को अंतिम रूप देकर स्वीकृत कर दिया गया। इन दरों के निर्धारण से अब प्रदेशभर के किसानों तक बीज का सुचारू और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो सकेगा।
इसके साथ ही, कृषि और शिक्षा क्षेत्र के अनूठे समन्वय को बढ़ावा देते हुए प्रदेश के ‘पीएमश्री’ स्कूलों की प्रयोगशालाओं के लिए ‘मिनी सॉइल टेस्टिंग किट’ खरीदने के टेंडर को भी मंजूरी प्रदान की गई। इस पहल के तहत सबसे पहले विद्यालयों के विद्यार्थियों को मिट्टी की जांच करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसके बाद ये स्कूल अपने आसपास के गांवों के किसानों के खेतों की मिट्टी का परीक्षण करेंगे।
राणा ने बताया कि मृदा जांच के बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा किसानों को उनकी जमीन की उर्वरता क्षमता के अनुसार आवश्यक पोषक तत्व मिलाने और उपयुक्त फसल बुआई की वैज्ञानिक सलाह दी जाएगी। इससे न केवल खेतों की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति में सुधार होगा और फसलों की पैदावार बेहतर होगी, बल्कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से किसानों की लागत घटकर उनकी शुद्ध आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

