नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान (Ramlila Maidan) में रविवार को इंडिया गठबंधन (INDIA Alliance) की ओर से आयोजित महारैली में विपक्षी एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में आयोजित इस रैली में 20 विपक्षी दलों के शीर्ष नेता एक मंच पर जुटे। रैली से पहले विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर अपनी एकजुटता दिखाई, जिसके बाद करीब चार घंटे तक चले कार्यक्रम में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए।
महारैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) पर वोट चोरी करवाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त देश की जनता की आवाज दबाने का काम कर रहे हैं और इसके लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
मुख्य चुनाव आयुक्त को जेल जाना होगा : राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यहां तक कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को जेल जाना होगा। वहीं, विपक्षी नेताओं ने एसआईआर की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताते हुए इसे चुनावी निष्पक्षता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया। रामलीला मैदान से विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं सार्वजनिक करते हुए सरकार तथा संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा।
महारैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि रामलीला मैदान में उमड़ी यह भीड़ किसी एक राजनीतिक दल या नेता के समर्थन में नहीं, बल्कि देश के संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्तियों को जिस तरह बेचा गया है, उसका हिसाब लिया जाएगा और इस मामले में किसी को भी जवाबदेही से बचकर निकलने नहीं दिया जाएगा।
राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता का सबसे बड़ा अधिकार उसका वोट है, लेकिन इसी अधिकार को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है और जनता के अधिकारों की लड़ाई कानूनी तथा राजनीतिक, दोनों स्तरों पर जारी रखी जाएगी। उनके संबोधन में संविधान की रक्षा, चुनावी पारदर्शिता और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही प्रमुख मुद्दे रहे।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महारैली के मंच से चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार जहां भी चले जाएं, विपक्ष उन्हें जवाबदेह ठहराकर रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि आज सरकार जनता के मताधिकार का सम्मान करने के बजाय खुद अपने मतदाता चुनने का काम कर रही है और मौजूदा चुनावी व्यवस्था जनादेश की चोरी पर आधारित होती जा रही है। खड़गे ने कहा कि देश के संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्षी दल एकजुट होकर सड़क पर उतरे हैं। उन्होंने विपक्ष की इस लड़ाई को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताते हुए कहा कि जनता के अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला
वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग उत्तर प्रदेश के रास्ते सत्ता में पहुंचे हैं, उनकी विदाई भी उत्तर प्रदेश से ही होगी। अखिलेश ने कहा कि यूपी की जनता स्वागत करना जानती है तो विदाई करना भी अच्छी तरह जानती है और 2027 में भाजपा की विदाई तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में वोट कटवाकर सरकार बनाई गई थी और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। अखिलेश ने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।
ममता बनर्जी ने चुनावी प्रक्रिया और परिणामों को लेकर तीखे सवाल उठाए
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी महारैली के मंच से चुनावी प्रक्रिया और परिणामों को लेकर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बंगाल में उनकी हार नहीं हुई, बल्कि उन्हें हराया गया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान मतगणना की पूरी प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुईं और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित किया गया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नौकरियों, नागरिक अधिकारों और लोगों के सम्मान तक की चोरी की जा रही है। ममता बनर्जी ने इन परिस्थितियों के लिए सत्ताधारी दल को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता के फैसले और अधिकारों का सम्मान होना चाहिए।

