कविता. रोहतक: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म तक रौनक बढ़ गई है। लोग कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स, गिफ्ट आइटम, मिठाइयों और घर की सजावट के सामान की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग में मिलने वाले भारी डिस्काउंट और आकर्षक ऑफर लोगों को खूब लुभा रहे हैं, लेकिन इसी त्योहारी सीजन में साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं।
ठगों की नजर आपकी खरीदारी, बैंक खाते और डिजिटल पेमेंट पर है। फर्जी वेबसाइट, नकली डिस्काउंट ऑफर, व्हाट्सएप लिंक, फर्जी डिलीवरी कॉल और यूपीआई के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा सकता है। थोड़ी सी लापरवाही आपकी त्योहार की खुशियों पर भारी पड़ सकती है।
भारी डिस्काउंट का लालच देकर फर्जी वेबसाइट पर फंसाते हैं ठग
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान सबसे ज्यादा खतरा फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर आने वाले आकर्षक ऑफर्स से रहता है। साइबर ठग नामी कंपनियों और शॉपिंग प्लेटफॉर्म जैसी दिखने वाली वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। इन पर मोबाइल, टीवी, लैपटॉप और महंगे सामान पर 70 से 90 प्रतिशत तक छूट का लालच दिया जाता है। ग्राहक कम कीमत देखकर बिना वेबसाइट की सत्यता जांचे ऑर्डर कर देते हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी कर देते हैं। इसके बाद न तो सामान पहुंचता है और न ही वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर कोई जवाब मिलता है। कई बार असली कंपनियों के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन भी चलाए जाते हैं। ऐसे में खरीदारी से पहले वेबसाइट का यूआरएल और उसकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।
गिफ्ट और कैशबैक के नाम पर व्हाट्सएप पर भेजे जा रहे फर्जी लिंक
दिवाली पर मुफ्त गिफ्ट, शॉपिंग वाउचर, कैशबैक और त्योहार की बधाई वाले मैसेज भी साइबर ठगी का जरिया बन सकते हैं। ठग व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए ऐसे लिंक भेजते हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि लिंक खोलते ही दिवाली गिफ्ट या हजारों रुपये का कैशबैक मिलेगा। कई बार इन मैसेज को किसी परिचित के नाम से भी भेजा जाता है। लिंक पर क्लिक करते ही व्यक्ति को फर्जी पेज पर ले जाया जाता है, जहां बैंक डिटेल, ओटीपी या यूपीआई से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है। कुछ लिंक के जरिए मोबाइल में संदिग्ध एप डाउनलोड करवाकर निजी जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है। इसलिए अनजान लिंक पर क्लिक करने और किसी भी तरह की बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना चाहिए।
फर्जी डिलीवरी कॉल और यूपीआई पेमेंट रिक्वेस्ट से खाते पर वार
त्योहारी सीजन में ऑनलाइन ऑर्डर बढ़ने के कारण साइबर ठग डिलीवरी के नाम पर भी लोगों को निशाना बनाते हैं। ठग खुद को कूरियर कंपनी या डिलीवरी एजेंट बताकर फोन करते हैं और कहते हैं कि आपका पार्सल रोक दिया गया है या डिलीवरी के लिए अतिरिक्त चार्ज देना होगा। इसके बाद एक लिंक भेजकर भुगतान करने को कहा जाता है। इसी तरह कई बार ठग पार्सल की डिलीवरी कन्फर्म करने के नाम पर यूपीआई पिन या ओटीपी मांगते हैं। ध्यान रखें कि यूपीआई पिन डालने का मतलब भुगतान करना है, पैसे प्राप्त करना नहीं। इसके अलावा ठग फर्जी पेमेंट स्क्रीनशॉट दिखाकर दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी चूना लगा सकते हैं। किसी भी भुगतान की पुष्टि केवल अपने बैंक खाते में राशि आने के बाद ही करें।
त्योहार पर खरीदारी के साथ बरतें डिजिटल सुरक्षा
साइबर ठगी से बचने के लिए ऑनलाइन खरीदारी हमेशा भरोसेमंद वेबसाइट या आधिकारिक एप से ही करें। किसी भी ऑफर पर भरोसा करने से पहले संबंधित कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर उसकी जानकारी जरूर जांचें। भुगतान के लिए सार्वजनिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने से बचें और मोबाइल में बैंकिंग से जुड़े ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा न करें। अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड न करें और न ही किसी को रिमोट एक्सेस दें। बैंक खाते से जुड़ा अलर्ट चालू रखें और संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें।

