Tuesday, February 17, 2026
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प्रयागराज कुंभ मेला: एक ऐतिहासिक आयोजन और उसके प्रभाव

प्रयागराज का कुंभ मेला, एक धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जो समय के साथ अपने आकार और महत्व में वृद्धि करता जा रहा है। 1906 में ब्रिटिश सरकार के समय यह मेला सिर्फ 10,000 रुपए की कमाई करता था, वहीं 2013 के कुंभ मेले में 12,000 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। इस बार, 13 जनवरी 2025 से शुरू हुआ महाकुंभ, पहले से भी अधिक भीड़ और कमाई का अनुमान है।

कुंभ मेले का आयोजन केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त जिम्मेदारी होती है। 2019 के अर्धकुंभ में 15 राज्यों की सरकारों ने 261 परियोजनाओं पर काम किया था। मेले के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा बुनियादी ढांचे, ट्रांसपोर्ट, पानी, बिजली, साफ-सफाई, मेडिकल सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था का इंतजाम किया जाता है।

2013 में प्रयाग कुंभ के लिए 160 किलोमीटर की पक्की सड़कें, 725 मीटर लंबे 18 पैंटून पुल, 250 डॉक्टरों की टीम और 6 हजार सफाईकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा, पानी की आपूर्ति के लिए 550 किलोमीटर पाइपलाइन और 42 पंप सेट्स लगाए गए थे। सुरक्षा के लिए 12,500 पुलिसकर्मी और 85 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे।

हर बार कुंभ मेले से लाखों अस्थायी नौकरियों का सृजन होता है। 2013 में 6 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला था, और इस बार भी यह संख्या बढ़ने की उम्मीद है। कुंभ मेला न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है।

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