कविता.रोहतक: भीषण गर्मी और लगातार बढ़ रही उमस के बीच बिजली की अघोषित कटौती लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई है।
पिछले तीन दिनों से शहर के कई इलाकों में रात के समय बार-बार बिजली गुल हो रही है। इससे लोग पूरी रात जागने को मजबूर हैं। हालात गांवों में और भी खराब हैं, जहां लंबे बिजली कट के कारण लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा है।
रात की कटौती से सबसे ज्यादा परेशानी
दिनभर की गर्मी के बाद लोगों को रात में राहत मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन इन्हीं घंटों में बिजली कटने से घर भट्टी जैसे हो जाते हैं। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। कई इलाकों में लोगों का कहना है कि रात में कई बार बिजली आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है, जिससे नींद भी पूरी नहीं हो पा रही।
गांवों में फूटा लोगों का गुस्सा
बिजली संकट को लेकर गांव मकड़ौली और टिटौली में ग्रामीणों का सब्र टूट गया। लगातार कई दिनों से बिजली कटौती से परेशान लोग देर रात सड़क पर उतर आए और विरोध जताया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और बिजली विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा। काफी देर समझाइश के बाद ग्रामीण शांत हुए, लेकिन उन्होंने जल्द व्यवस्था सुधारने की मांग दोहराई।
उमस ने बढ़ाई मुश्किल, कूलर-पंखे भी बेकार
मौसम में नमी बढ़ने से उमस लोगों को बेहाल कर रही है। ऐसे में बिजली जाते ही कूलर, पंखे और अन्य उपकरण बंद हो जाते हैं। रात में बंद कमरों में बैठना मुश्किल हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि बिजली कटौती जारी रही तो आने वाले दिनों में परेशानी और बढ़ सकती है।
कारोबार और पढ़ाई पर भी असर
बिजली कटौती का असर केवल घरेलू जीवन तक सीमित नहीं है। छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और घरेलू उद्योगों का काम भी प्रभावित हो रहा है। वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल-कॉलेज की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को रात में पढ़ाई करने में दिक्कत हो रही है। कई लोगों का कहना है कि अघोषित कटौती की जानकारी भी पहले से नहीं दी जाती।
लोगों की मांग, समय पर मिले बिजली
लगातार हो रही कटौती के बाद लोगों की मांग है कि यदि तकनीकी कारणों या लोड बढ़ने के कारण बिजली बंद करनी पड़ती है तो उसका समय पहले से सार्वजनिक किया जाए। साथ ही रात के समय अनावश्यक कटौती से बचा जाए ताकि भीषण गर्मी और उमस के बीच लोगों को राहत मिल सके। शहर और गांव दोनों जगह अब लोग बिजली व्यवस्था में जल्द सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

