Monday, July 27, 2026
Homeहरियाणारोहतकसंक्रामक और महिलाओं की बीमारी में अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा: हरियाणा केंद्रीय...

संक्रामक और महिलाओं की बीमारी में अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा: हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ PGIMS रोहतक ने किया एमओयू

रोहतक : पीजीआईएमएस द्वारा मरीजों को प्रदान किए जा रहे उच्च गुणवत्ता के इलाज की प्रतिबंद्वता को और अधिक मजबूत करने के लिए गुरुवार को पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के साथ एक एमओयू किया है जोकि चिकित्सा जगत में संक्रामक और महिलाओं की बीमारी में अनुसंधान को काफी अधिक बढ़ावा देगा और इससे प्रदेश व आसपास के अन्य राज्यों की जनता को फायदा मिलेगा।

यह कहना है पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल का। कुलपति डाॅ.एच.के. अग्रवाल ने इस एमओयू पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार और उनका हमेशा यही प्रयास रहा है कि शोध के क्षेत्र में अधिक से अधिक कार्य किया जाए जिससे मरीजों को नवीनतम तकनीक से इलाज मिले और सटीक इलाज मिले। इसी कड़ी के मद्देनजर आज सीयूएच के साथ यह अहम एमओयू साइन किया गया है।

उन्होंने कहा कि सीयूएच के साथ मिलकर कई प्रोजेक्टों पर रिसर्च की जाएगी, जिसमें मुख्यत हड्डी की टीबी पर रिसर्च शामिल रहेगी, जिसमें यहां मरीजों की हड्डी से सैंपल लेकर वहां भेजा जाएगा और वहां कीट के माध्यम से एक ही दिन में पता चल जाएगा कि मरीज को हड्डी की टीबी है या नहीं।

डाॅ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि इसके साथ ही अक्सर देखने में आता है कि महिलाओं में एंडियोमैट्ोसिस की जांच के लिए यहां से ब्लड सैंपल महेंद्रगढ़ भेजा जाएगा, जहां से एक दिन मे मरीज की बीमारी का पता चल जाएगा, जिससे महिला का समय पर इलाज शुरू करके बीमारी को रोका जा सकेगा।

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ के कुलपति डाॅ. टंकेश्वर कुमार ने बताया कि पीजीआईएमएस रोहतक के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोगी अनुसंधान और नैदानिक इंटरफेस को आगे बढ़ाना है।

डाॅ. टंकेश्वर ने बताया कि सीयूएच के बायोकेमिस्ट्री विभाग द्वारा शुरू की गई इस साझेदारी का उद्देश्य पीजीआईएमएस के चिकित्सकों के साथ संयुक्त अनुसंधान पहल को बढ़ावा देना है, जो लाइफस्टाइल विकार, महिलाओं के स्वास्थ्य और संक्रामक रोगों पर ध्यान केंद्रित करेगी, जो इस क्षेत्र में प्रमुख चिकित्सा और सामाजिक चुनौतियाँ हैं।

कुलसचिव डाॅ. रूपसिंह ने कहा कि यह साझेदारी अंतर-संस्थागत अनुसंधान को गति देगी, अनुवादात्मक परिणामों को बढ़ावा देगी और नए वित्त पोषित परियोजनाओं को आकर्षित करेगी।

निदेशक डाॅ.एस.के. सिंघल ने बताया कि इस सहयोग के तहत, सीयूएच और पीजीआईएमएस संयुक्त शोध परियोजनाएं, डेटा-ड्राइवेन स्वास्थ्य मूल्यांकन, प्रशिक्षण कार्यक्रम और संसाधन-शेयरिंग पहल शुरू करेंगे, जो चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी विज्ञान में क्षेत्रीय क्षमता को बढ़ाएंगे।

सीयूएच से डाॅ. विकास धीगडा ने बताया कि उनके यहां बायो मेडिकल पर भी रिसर्च चल रही है, जिससे सारी पॉलीथिन को फंगस और बैक्टीरिया के माध्यम से खत्म किया जा सकता है। डाॅ. अंतरेश कुमार ने बताया कि इस एमओयू से पार्किंसंस रोग की जल्द पहचान में भी मदद मिलेगी।

इस अवसर पर कुलसचिव डाॅ. रूपसिंह, निदेशक डाॅ.एस.के. सिंघल, डीन एकेडमिक अफेयर्स डाॅ. एम.जी. वशिष्ठ, डीन डाॅ. अशोक चौहान, डीन छात्र कल्याण डाॅ. सविता सिंघल, स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डाॅ. पुष्पा दहिया, सीयूएच से प्रो.अंतरेश कुमार, प्रो. पवन कुमार मौर्या, पीजीआई के पूर्व हड्डी रोग विशेषज्ञ डाॅ. विकास धीगडा भी उपस्थित रहे।

RELATED NEWS
spot_img

Most Popular