कविता.रोहतक : रोहतक समेत पूरे हरियाणा में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ाने लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आने वाले दिनों में तेल कंपनियां फिर दाम बढ़ा सकती हैं। हाल ही में पेट्रोल और डीजल के रेट में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है और अब लोगों को डर है कि महंगाई का यह बोझ और बढ़ सकता है।
रोहतक में रोजाना बाइक, कार और कमर्शियल वाहनों से सफर करने वाले लोगों का कहना है कि पहले ही घरेलू बजट संभालना मुश्किल हो रहा है। अब अगर तेल के दाम और बढ़े तो सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ेगा।
रोहतक में क्या है मौजूदा स्थिति
रोहतक में फिलहाल पेट्रोल करीब 95 से 98 रुपए प्रति लीटर और डीजल 88 से 91 रुपए प्रति लीटर के बीच बिक रहा है। सीएनजी के रेट भी बढ़े हुए हैं। शहर में ऑटो चालकों, टैक्सी ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि तेल महंगा होने से उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है।
पेट्रोल पंप संचालकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने का असर जल्द ही स्थानीय बाजार में दिखाई देता है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में दुनिया में कहीं भी युद्ध, तनाव या सप्लाई रुकने की आशंका पैदा होती है तो उसका असर सीधे भारत पर पड़ता है। इस समय ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिम एशिया दुनिया का बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है और यहां से बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होता है। खासतौर पर होर्मुज से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।
रोहतक के लोगों पर क्या असर पड़ेगा
रोहतक में बड़ी संख्या में लोग रोजाना निजी वाहनों से सफर करते हैं। इसके अलावा जिले का व्यापार और मंडी व्यवस्था भी ट्रांसपोर्ट पर निर्भर है। ऐसे में डीजल महंगा होने से हर चीज की लागत बढ़ सकती है।
इन चीजों पर दिख सकता है असर
सब्जियों और फलों के दाम, दूध और राशन, बस और ऑटो किराया, खेती-किसानी का खर्च, ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई
किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ी
रोहतक और आसपास के ग्रामीण इलाकों में खेती मुख्य रोजगार का बड़ा साधन है। किसान पहले ही खाद, बीज और बिजली के बढ़ते खर्च से परेशान हैं। अब डीजल महंगा होने से ट्रैक्टर और सिंचाई की लागत भी बढ़ सकती है। वहीं छोटे कारोबारियों का कहना है कि माल ढुलाई महंगी होने से व्यापार पर असर पड़ेगा। कई दुकानदारों का मानना है कि आने वाले समय में रोजमर्रा की चीजें और महंगी हो सकती हैं।
डॉलर और रुपये का भी असर
तेल खरीदने के लिए भारत को डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। अगर डॉलर मजबूत और रुपया कमजोर होता है, तो तेल खरीदना और महंगा हो जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ रुपये की कमजोरी भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाती है।
सरकार पर टैक्स घटाने का दबाव
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स का बड़ा हिस्सा शामिल होता है। लोगों का कहना है कि अगर सरकार टैक्स में राहत दे तो आम आदमी को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।
क्या कहते हैं पेट्रोल पंप एसोसिएशन के प्रधान
पेट्रोल पंप एसोसिएशन, रोहतक के प्रधान पुनीत कौशिक का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल के रेट में और बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

