Tuesday, January 13, 2026
Homeदेशसांसद दीपेन्द्र हुड्डा बोले- भगवान राम करोड़ों भारतीयों के आराध्य हैं, उनके...

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा बोले- भगवान राम करोड़ों भारतीयों के आराध्य हैं, उनके नाम पर गरीबों का निवाला न छीने BJP सरकार

रोहतक : सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने भगवान राम करोड़ों भारतीयों के आराध्य हैं, बीजेपी सरकार उनके नाम पर गरीबों का निवाला न छीने। महात्मा गांधी से बढ़ा राम भक्त कौन हो सकता है जिनके आखिरी शब्द ही ‘हे राम!’ थे। दीपेन्द्र हुड्डा शुक्रवार को रोहतक में कांग्रेस पार्टी की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, बीजेपी ने मनरेगा का केवल नाम ही नहीं बदला बल्कि बजट भी घटा दिया और मजदूरों का अधिकार भी खत्म कर दिया। मनरेगा मजदूरों के अधिकारों को हड़पने के प्रयासों के विरोध में कांग्रेस पार्टी मजबूती से खड़ी है और पूरे देश में उनके रोजगार के अधिकार की रक्षा करेगी। बीजेपी शुरू से ही मनरेगा योजना को लेकर असहज थी और इसे राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से देख रही थी। यूपीए सरकार की मनरेगा योजना को पूरे विश्व में सराहा गया। करोड़ों मजदूरों को इस योजना से रोजगार मिला, इसलिए बीजेपी को ये योजना सुहा नहीं रही थी। बीजेपी सरकार केवल नाम बदलने में विश्वास रखती है काम में नहीं। उन्होंने कहा कि देश का मजदूर बीजेपी सरकार द्वारा उसके रोजगार के अधिकार को छीनने की इस साजिश को समझ चुका है। मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत काँग्रेस पार्टी संसद से सड़क तक लड़ेगी और इस योजना को समाप्त नहीं होने देगी।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि पहले योजना डिमाण्ड आधारित थी यानी मनरेगा कानून में बजट की कोई सीमा नहीं थी, किसी राज्य, जिले में चाहे जितने लोग काम मांगते थे उन्हें काम देना होता था और केंद्र सरकार को उतना ही बजट भी देना होता था। अब नये कानून में केंद्र सरकार फैसला करेगी कि किस राज्य को कितना बजट देना है या नहीं देना है। यानी अब अगर बजट ख़त्म हो गया तो रोजगार नहीं मिलेगा! इसी तरह नए कानून में मजदूरों के अधिकार को भी खत्म कर दिया गया। पहले काम मांगने पर न मिलने के 15 दिन बाद से बेरोजगारी भत्ता/मुआवजा देने का प्रावधान था। लेकिन संसद में सांसद वरुण मुलाना द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब से पता चला कि हरियाणा में 8 लाख से अधिक मनरेगा मज़दूर पंजीकृत व सक्रिय हैं, लेकिन 2024-25 में महज़ 2,191 परिवारों को ही 100 दिन का काम मिला। 2019 के बाद से हरियाणा में मनरेगा योजना के तहत किसी को भी बेरोजगारी भत्ता नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि हम मांग करते रहे कि मनरेगा को कृषि से जोड़ा जाए लेकिन अब नया नियम आ गया कि कटाई-बुवाई के सीजन में 60 दिनों के लिए मनरेगा योजना का क्रियान्वयन रोक दिया जाएगा। यूपीए सरकार के समय देश का औसत कार्यदिवस 100 दिन के करीब था जो पिछले 5 साल में घटकर औसत कार्यदिवस 48 दिन पर आ गया, लेकिन बीजेपी सरकार 125 दिन का काम देने का दावा कर रही है। यही नहीं, बीजेपी ने मनरेगा का केवल नाम ही नहीं बदला बल्कि योजना का बजट भी घटा दिया। मनरेगा बजट 2020-21 में 1,11,171 करोड़ रुपये जारी हुआ था जो 2024-25 में घटाकर 85839 करोड़ कर दिया गया। हरियाणा को 2020-21 में 764 करोड़ रुपये दिए लेकिन 2024-25 में इसे घटाकर घटकर 590 करोड़ कर दिया। केंद्र सरकार ने अपना शेयर 100% से घटाकर 60% कर दिया और 40% वित्तीय बोझ राज्यों पर डाल दिया। VB GRAM G अधिनियम में केंद्र सरकार तय करेगी कि पैसे का आवंटन कैसे होगा, किस आधार पर होगा और किन पंचायतों को इसका लाभ मिलेगा। जबकि पहले मनरेगा कानून में काम देने का कार्यक्रम ग्राम पंचायत बनाती थी, मंजूर करती थी और इसे मॉनीटर भी करती थी। VB GRAM G कानून के तहत अब सारे ग्रामीण कार्य ‘PM Gati Shakti National Master Plan’ के अनुरूप होंगे यानी सबकुछ केंद्र सरकार पर निर्भर होगा। यानी कुल मिलाकर पंचायती सिस्टम को भी कमजोर किया जा रहा है।

सांसद ने कहा कि मनरेगा योजना से महात्मा गांधी जी का नाम हटाना भाजपा की असल साजिश है। बीजेपी को भगवान् राम के नाम से कोई योजना लानी ही थी, तो कोई नयी योजना लानी चाहिए थी और बजट बढ़ाना चाहिए था। हरियाणा सरकार की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा पहले ही लाखों करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है। उसके पास काम न मिलने पर नियमानुसार बेरोजगारी भत्ता देने तक का पैसा नहीं है, अपनी योजनाओं, खेल स्टेडियम की मरम्मत के लिए पैसे मिल नहीं रहे और केंद्र ने 40% मनरेगा बजट का बोझ डाल दिया। हरियाणा में न तो निवेश हुआ न विकास दर बढ़ी। भ्रष्टाचार व्यापक हो गया। बीजेपी सरकार में लोग कष्ट का जीवन काट रहे जबकि बीजेपी के ज्यादातर विधायक कालोनियाँ काट रहे हैं।

दीपेन्द्र हुड्डा ने हरियाणा में एचपीएससी के माध्यम से ज्यादातर बाहर के बच्चों की भर्ती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खुद एचपीएससी के चेयरमैन भी बाहर के लगे हुए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या 3 करोड़ हरियाणावासियों में एक भी कोई ऐसा कोई नागरिक हरियाणा का नहीं मिला जो एचपीएससी चेयरमैन लग सके। हरियाणावासियों का एक साजिश के तहत हक भी मारा जा रहा है और जिन वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता है उनके साथ भी बड़ा धोखा हो रहा है। हरियाणा के युवा डंकी रूट से पलायन कर रहे और हरियाणा में ग्रुप ए, बी की, सी की नौकरियों का पलायन दूसरे प्रदेशों में हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान, पंजाब आदि सभी प्रदेशों में वहाँ के डोमिसाइल को प्राथमिकता दी जाती है। बजाय इसके HPSC चेयरमैन बयान दे रहे हैं कि यहाँ की यूनिवर्सिटी में बच्चों को ठीक से पढ़ाया ही नहीं गया! पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी बयान दिया था कि हरियाणा के बच्चे कंधे के ऊपर कमजोर होते हैं क्या बीजेपी सरकार का हरियाणावासियों के प्रति ये आकलन है?

हरियाणा के बाहर के प्रदेशों के बच्चों के चयन और आरक्षित वर्गों की सीट खाली छोड़े जाने का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हरियाणा पावर यूटिलिटीज (HPU) में असिस्टेंट इंजीनियर AE/SDO भर्ती में 214 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया जिसमें से केवल 29 हरियाणा के थे। हरियाणा के जो बच्चे यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा निकाल लेते हैं, वो हमारे खुद के एचपीएससी से असिस्टेंट इंजीनियर में क्यों नहीं आ पा रहे?

दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि इससे पहले सिविल जज के चयन में 110 उसमें से 60 बाहर के, सिंचाई विभाग में 49 में से 28 हरियाणा से बाहर के उम्मीदवार थे। एसडीओ इलेक्ट्रिकल में 80 में से 69 बाहर के, केवल 2 ही हरियाणा के थे। इसी तरीके से टेक्निकल एजुकेशन डिपार्टमेंट में लेक्चरर में 153 में से 106 बाहरी उम्मीदवार चयनित हुए।

सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि जिन वर्गों को आरक्षण से लाभ मिलना चाहिए था, उन वर्गों के साथ भी बैकडोर से बड़ा धोखा किया जा रहा है। इसका भी उदाहरण देते हुए बताया पिछले हफ्ते असिस्टेंट प्रोफेसर, इंग्लिश 613 में से कुल 151 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, बाकी पद खाली रहे। डीएससी वर्ग के साथ बड़ा अन्याय करते हुए 60 रिजर्व सीट्स में से केवल 1 का चयन किया गया, 35% और कई कंडीशंस की आड़ में बाकी खाली छोड़ दी गई। इसके विरोध में आज भी हमारे युवा कड़ाके की ठंडी में धरने पर बैठे हैं।

पत्रकार वार्ता के दौरान प्रमुख रूप से पूर्व मंत्री सुभाष बत्रा, विधायक बीबी बतरा, विधायक शकुंतला खटक, विधायक बलराम दांगी, पूर्व मंत्री आनंद सिंह दांगी, प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह, चक्रवर्ती शर्मा, जयदीप धनखड़, जिलाध्यक्ष बलवान रंगा, जिलाध्यक्ष कुलदीप केडी, सूरजमल किलोई, सूरजमल रोज, गुलशन ईशपुनियानी आदि मौजूद रहे।

RELATED NEWS

Most Popular