- नगर निगम नालों की सफाई के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत सवाल खड़े कर रही
कविता.रोहतक : मानसून ने हरियाणा में दस्तक दे दी है और रोहतक में भी कभी भी तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल शहर की जलनिकासी व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। नगर निगम एक ओर नालों और सीवरों की सफाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सफाई के तरीके पर ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शहर के कई इलाकों में सीवर से निकाली गई गंदगी को उठाने के बजाय वहीं छोड़ दिया जा रहा है। यदि समय रहते इसे नहीं हटाया गया तो पहली ही तेज बारिश में यही गंदगी दोबारा सीवर और नालों में बहकर पहुंच जाएगी और पूरी सफाई पर पानी फिर जाएगा।
जनता कॉलोनी में हाल ही में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहां सीवर की सफाई के बाद निकली सिल्ट कई दिनों तक वहीं पड़ी रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक कॉलोनी की समस्या नहीं, बल्कि शहर के अधिकांश हिस्सों में यही तरीका अपनाया जाता है।
सफाई हुई लेकिन आधा काम अधूरा छोड़ दिया
नगर निगम की टीमें सीवर की सफाई तो कर रही हैं, लेकिन बाहर निकाली गई सिल्ट और कचरे का समय पर उठान नहीं हो रहा। कई जगह यह गंदगी घंटों नहीं बल्कि कई दिनों तक सड़क किनारे या सीवर के पास पड़ी रहती है। ऐसे में सफाई अभियान का उद्देश्य ही अधूरा रह जाता है।
पहली बारिश में फिर सीवर में पहुंच जाएगी गंदगी
सीवर से निकली सिल्ट यदि तुरंत नहीं हटाई गई तो बारिश का पानी उसे दोबारा बहाकर उसी सीवर या नाले में पहुंचा देगा। इससे पाइपलाइन और नाले फिर जाम हो सकते हैं। यानी जिस गंदगी को निकालने में पूरा दिन लगा, वह कुछ ही मिनटों की बारिश में वापस अंदर चली जाएगी।
जनता कॉलोनी बना लापरवाही का उदाहरण
जनता कॉलोनी में हाल ही में सीवर की सफाई के बाद निकली गंदगी को वहीं छोड़ दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले यदि इसे नहीं उठाया गया तो पूरी कॉलोनी में जलभराव की स्थिति बन सकती है। लोगों ने निगम से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
नालों की सफाई के दावों पर उठ रहे सवाल
नगर निगम लगातार शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई का दावा कर रहा है, लेकिन कई स्थानों पर काम अब भी धीमी गति से चल रहा है। मानसून शुरू होने के बावजूद कई नालों की पूरी तरह सफाई नहीं हो पाई है। ऐसे में आशंका है कि तेज बारिश आने तक तैयारियां पूरी नहीं हो पाएंगी।
हर साल दोहराई जाती है वही कहानी
शहर में लगभग हर मानसून से पहले सफाई अभियान चलता है, लेकिन पहली या दूसरी तेज बारिश के बाद कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। लोगों का कहना है कि यदि सफाई के बाद निकले कचरे और सिल्ट का तत्काल निस्तारण नहीं किया जाएगा तो हर साल करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद नतीजा वही रहेगा।
इस बार परीक्षा नगर निगम की
अभी तक रोहतक में मानसून की बहुत तेज बारिश नहीं हुई है। यानी नगर निगम के पास व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का अभी भी अवसर है। यदि सीवरों से निकली गंदगी का तुरंत उठान किया जाए, नालों की सफाई समय पर पूरी हो और जलनिकासी व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई जाए तो शहर को जलभराव से काफी हद तक बचाया जा सकता है। लेकिन यदि लापरवाही जारी रही तो इस बार भी पहली मूसलाधार बारिश रोहतक की तैयारियों की पोल खोल सकती है।

