Wednesday, June 17, 2026
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MDU के फार्मेसी विभाग की मेडिकेटेड च्युइंग गम को मिला पेटेंट

Rohtak News : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) के फार्मेसी विभाग के वैज्ञानिकों ने मोशन सिकनेस से बचाव के लिए एक विशेष मेडिकेटेड च्युइंग गम विकसित की है, जिसे भारतीय पेटेंट कार्यालय से पेटेंट मिला है। यह नवाचार सफर के दौरान दवा लेने की परेशानी को कम करने के साथ मरीजों को तेजी से राहत देने में मददगार साबित हो सकता है।

यह पेटेंट एमडीयू के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक कौशिक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीत मित्तल और पूर्व शोधार्थी डॉ. प्रेरणा कौशिक के संयुक्त शोध को मिला है। शोध टीम ने एमडीयू कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ और कुलसचिव प्रो संदीप बंसल से शिष्टाचार भेंट कर उन्हें पेटेंट स्वीकृति पत्र सौंपा। शोधकर्ताओं ने इस सफलता का श्रेय विश्वविद्यालय में उपलब्ध उत्कृष्ट शोध वातावरण और प्रशासनिक सहयोग को दिया।

कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया ने ने शोध टीम को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर बधाई देते हुए भविष्य में समाजोपयोगी शोध एवं नवाचारों को और गति देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में ऐसे शोध को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो सीधे आमजन की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करें। उन्होंने शोधकर्ताओं को फंडिंग परियोजनाओं और तकनीक के व्यवसायीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

एमडीयू के कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में शोध को प्रोत्साहित करने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नवाचार समाज के लिए उपयोगी साबित होगा और चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलेगा।

प्रो. दीपक कौशिक, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीत मित्तल और पूर्व शोधार्थी डॉ. प्रेरणा कौशिक ने बताया कि मोशन सिकनेस में इस्तेमाल होने वाली प्रोमेथाजीन दवा का स्वाद काफी कड़वा होता है, जिससे कई बार मरीजों में मतली और उल्टी की समस्या और बढ़ जाती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए स्वाद छिपाने वाली विशेष तकनीक के साथ यह मेडिकेटेड च्युइंग गम तैयार की गई है।

जानें- च्युइंग गम की खासियत

इस च्युइंग गम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लेने के लिए पानी की जरूरत नहीं होगी। यात्री सफर के दौरान कभी भी और कहीं भी आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार, च्युइंग गम चबाने की प्रक्रिया खुद भी मतली और चक्कर की समस्या को कम करने में सहायक मानी जाती है। दवा मुंह की झिल्ली के जरिए सीधे शरीर में अवशोषित होती है, जिससे इसका असर तेजी से शुरू होता है और पेट से होकर गुजरने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
शोधकर्ताओं के मुताबिक यह तकनीक उन मरीजों के लिए भी उपयोगी होगी जिन्हें दवा निगलने में कठिनाई होती है। स्वाद छिपाने की आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक गम बेस के इस्तेमाल से इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए सुविधाजनक बनाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह पेटेंटेड उत्पाद बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से विकसित होकर यात्रियों और मरीजों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।

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