Saturday, February 14, 2026
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MDU ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित किया

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक (MDU Rohtak) ने अपने स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर पूर्व छात्र एवं भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को विशिष्ट पूर्व छात्र अलंकरण से सम्मानित कर विश्वविद्यालय समुदाय को गौरवान्वित किया।

समारोह के दौरान प्रो. सुरेंद्र कुमार ने सिटेशन का वाचन किया। सम्मान-पत्र में न्यायमूर्ति सूर्यकांत की प्रेरक जीवन यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वर्ष 1962 में हरियाणा के हिसार जिले के ग्राम पेटवाड़ से आरंभ हुई उनकी यात्रा महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय तक पहुँची, जहाँ से उन्होंने वर्ष 1984 में विधि स्नातक (एलएलबी) की उपाधि प्राप्त की। यहीं से उन्होंने न्याय-सेवा के पथ पर अपने उज्ज्वल करियर की नींव रखी।

सिटेशन में उल्लेख किया गया कि जुलाई 2000 में हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता के रूप में नियुक्ति से लेकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुँचना उनकी असाधारण प्रतिभा, अदम्य परिश्रम, विधि के प्रति निष्ठा और उच्च नैतिक मूल्यों का सशक्त प्रमाण है। उनकी न्यायिक यात्रा भारतीय न्यायपालिका में उत्कृष्टता और प्रतिबद्धता का मानक स्थापित करती है।

विश्वविद्यालय ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत के निर्णयों में निहित निष्पक्षता, मानवीय संवेदनशीलता और संविधान के प्रति अटूट आस्था की विशेष सराहना की। सम्मान-पत्र में कहा गया कि उन्होंने अपने न्यायिक दृष्टिकोण से न केवल न्यायपालिका को सुदृढ़ नैतिक आधार प्रदान किया, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक परंपराओं को भी मजबूती दी है।

कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने कहा कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत की उपलब्धियां विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य विद्या विनयेन शोभते की सजीव और प्रेरणादायी अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत जैसे पूर्व छात्र एमडीयू की शैक्षणिक परंपरा, मूल्यों और सामाजिक दायित्व बोध का प्रतीक हैं। विश्वविद्यालय परिवार उनकी विशिष्ट संवैधानिक सेवाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए यह अलंकरण प्रदान कर स्वयं को सम्मानित अनुभव करता है।

इस अवसर पर डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस.सी. मलिक, कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत, वरिष्ठ प्राध्यापकगण, पूर्व छात्र, न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी तथा बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। समारोह का वातावरण प्रेरणा, गौरव और विश्वविद्यालय की स्वर्णिम विरासत के स्मरण से ओतप्रोत रहा।

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