रोहतक : भारतीय शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने 30 जनवरी 2026 को एमडीयू के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशंस विभाग के शोध दल को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एक अत्याधुनिक स्वास्थ्य तकनीक के लिए पेटेंट प्रदान किया है। यह पेटेंट शोधार्थी छाया गुप्ता, प्रो. नसीब सिंह गिल एवं प्रो. प्रीति गुलिया को छाती के एक्स-रे चित्रों के माध्यम से कोविड-19 जैसी बीमारियों की पहचान करने की नवोन्मेषी विधि विकसित करने के लिए दिया गया है।
यह पेटेंट प्राप्त तकनीक एआई आधारित एल्गोरिद्म के माध्यम से छाती के एक्स-रे चित्रों का विश्लेषण कर कोविड-19, निमोनिया और अन्य श्वसन संक्रमणों की तेज़, सटीक और विश्वसनीय पहचान करती है। जहां पारंपरिक आरटी-पीसीआर जांच में कई घंटे या कभी-कभी दिन लग जाते हैं, वहीं यह प्रणाली कुछ ही मिनटों में परिणाम उपलब्ध करा सकती है, जिससे समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
शोधकर्ताओं द्वारा विकसित यह प्रणाली एक उपयोगकर्ता-अनुकूल वेब एप्लीकेशन के रूप में कार्य करती है, जो पहले से प्रशिक्षित कंप्यूटर मॉडल का उपयोग करती है। चूंकि यह तकनीक मौजूदा एक्स-रे मशीनों पर आधारित है, इसलिए यह बड़े अस्पतालों के साथ-साथ छोटे स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी बेहद उपयोगी सिद्ध हो सकती है, जहां उन्नत प्रयोगशाला सुविधाएं सीमित होती हैं।
पेटेंट विवरण के अनुसार, इस विधि ने कोविड-19 जैसी बीमारियों की पहचान में उच्च सटीकता और भरोसेमंद परिणाम प्रदर्शित किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की एआई आधारित तकनीकें महामारी जैसी स्थितियों में त्वरित स्क्रीनिंग, रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

