कविता.रोहतक : रोहतक नगर निगम हाउस की बैठक 22 अक्टूबर को होने जा रही है, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सियासी पारा चढ़ गया है। इस बार विपक्ष नहीं, बल्कि भाजपा के अपने ही पार्षद सवालों की झड़ी लगाने की तैयारी में हैं।
पार्षदों का साफ कहना है कि जब पुराने एजेंडों पर ही काम नहीं हुआ तो नए प्रस्ताव देने का क्या फायदा। वार्डों में विकास कार्य अटकने से नाराज पार्षदों ने अपनी ही सरकार और निगम व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेयर राम अवतार वाल्मीकि ने नाराजगी दूर करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।
अब पूर्व मंत्री को मोर्चा संभालने की पेशकश की गई है। 19 अक्टूबर को पार्षदों के साथ बैठक कर उन्हें मनाने की कोशिश होगी। ऐसे में सात महीने बाद होने वाली हाउस की बैठक में विकास कार्यों से ज्यादा पुराने एजेंडों पर जवाब-तलब और सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।
विपक्ष के साथ साथ भाजपा के पार्षद भी पूछ रहे सवाल
नगर निगम में इस बार सियासी समीकरण कुछ अलग नजर आ रहे हैं। जिन पार्षदों को पार्टी के साथ खड़े होकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए, वही अब पुराने एजेंडों पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर नाराज हैं। खास बात यह है कि सवाल उठाने वालों में भाजपा के पार्षद भी शामिल हैं। पार्षदों की शिकायत है कि वार्डों में काम अटके पड़े हैं और बार-बार मुद्दे उठाने के बावजूद समाधान नहीं हो रहा। ऐसे में उनकी नाराजगी अब नए एजेंडे देने से इनकार के रूप में सामने आ रही है। यह स्थिति निगम के साथ-साथ पार्टी नेतृत्व के लिए भी चुनौती बन गई है।
पुराने एजेंडे ठंडे बस्ते में, नए प्रस्ताव देने से इनकार
हाउस की बैठक के लिए नए एजेंडे मांगे गए, लेकिन अधिकतर पार्षदों ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाई। उनका तर्क है कि जब पिछली बैठकों में उठाए गए मुद्दों पर ही काम नहीं हुआ तो नए प्रस्ताव देने का क्या मतलब। पार्षदों की इस बेरुखी ने निगम अधिकारियों और नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। दरअसल, हाउस की बैठक में एजेंडों पर चर्चा के बाद वार्डों में विकास कार्यों की उम्मीद बंधती है, लेकिन यदि पुराने प्रस्ताव ही फाइलों में अटके रहें तो पार्षदों को अपने वार्ड के लोगों के सामने जवाब देना मुश्किल होता है। यही वजह है कि इस बार नए एजेंडों से ज्यादा पुराने प्रस्तावों का हिसाब मांगने की तैयारी दिखाई दे रही है।
कपिल नागपाल, सुरेश किराड़ और रिंकू सहित कई ने उठाए वार्डों के मुद्दे
पार्षद कपिल नागपाल, सुरेश किराड़ और रिंकू सहित कई पार्षदों ने वार्डों में विकास कार्य अटकने की बात उठाई है। पार्षदों की नाराजगी का केंद्र यही है कि समस्याएं सामने रखने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ रहे। वार्डों में जनता की उम्मीदें पार्षदों से जुड़ी होती हैं और जब काम नहीं होते तो लोगों के सवालों का सामना भी उन्हें ही करना पड़ता है। ऐसे में पार्षद अब केवल नए प्रस्ताव देकर औपचारिकता निभाने के मूड में नहीं दिख रहे। उनका रुख साफ संकेत दे रहा है कि अगली बैठक में पुराने एजेंडों की प्रगति पर चर्चा टालना आसान नहीं होगा।
मेयर का डैमेज कंट्रोल फेल, अब पूर्व मंत्री की एंट्री
सूत्रों के अनुसार, पार्षदों की नाराजगी सामने आने के बाद मेयर राम अवतार वाल्मीकि ने उन्हें मनाने और स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल बात बनती नजर नहीं आ रही। अब इस मामले में पूर्व मंत्री को मोर्चा संभालने की पेशकश की गई है। 19 अक्टूबर को पार्षदों के साथ बैठक प्रस्तावित है, जिसमें उनकी शिकायतें सुनने और उन्हें नए एजेंडे देने के लिए मनाने का प्रयास किया जाएगा। अब देखना होगा कि पूर्व मंत्री की पहल से पार्षदों की नाराजगी दूर होती है या नहीं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बैठक से पहले ही विवाद सुलझ जाएगा या फिर हाउस में ही पार्षद अपने सवालों के साथ नेतृत्व और अधिकारियों को घेरेंगे।
22 अक्टूबर को सदन में विकास का हिसाब या सियासी घमासान
सात महीने बाद होने वाली नगर निगम हाउस की बैठक में इस बार केवल नए प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना नहीं है। पुराने एजेंडों पर कार्रवाई, वार्डों में अटके विकास कार्य और पार्षदों की अनदेखी जैसे मुद्दे छाए रह सकते हैं। यदि बैठक से पहले नाराजगी दूर नहीं हुई तो सदन में तीखे सवाल-जवाब होना तय माना जा रहा है। भाजपा पार्षदों के सवाल पार्टी नेतृत्व के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं। अब निगाहें 19 अक्टूबर की बैठक पर टिकी हैं। वहां सहमति बनती है तो हाउस की बैठक सामान्य रह सकती है, लेकिन यदि पार्षद अपनी मांगों पर अड़े रहे तो 22 अक्टूबर को निगम सदन में विकास कार्यों का हिसाब मांगने के साथ सियासी पारा भी चढ़ सकता है।

