International Childhood Cancer Day : पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक (PGIMS) के शिशु रोग विभाग की ओपीडी में अंतर्राष्ट्रीय बाल कैंसर दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. अलका ने किया, जिन्होंने कैंसर से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अलका के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने बाल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके इलाज में नवीनतम तकनीकों के बारे में जानकारी दी। डॉ अल्का ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए चिकित्सा अधीक्षक एवं शिशु रोग विभाग अध्यक्ष डॉक्टर कुंदन मित्तल का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि बाल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर निदान और उचित इलाज से इसे ठीक किया जा सकता है। डॉ. अलका ने कहा, “हमारा उद्देश्य न केवल इलाज करना है, बल्कि बच्चों और उनके परिवारों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी है।”
इस अवसर पर कैंसर से ठीक हो चुके बच्चों को पुरस्कार और सम्मान पत्र भेंट किए गए। इन बच्चों ने अपनी कहानियां साझा कीं और बताया कि कैसे उन्होंने इस बीमारी से लड़ाई लड़ी। एक बच्चे ने कहा, “डॉ. अलका और उनकी टीम ने मुझे नई जिंदगी दी। मैं अब अपने सपनों को पूरा करने के लिए तैयार हूं।” इस दौरान कई मरीज बच्चों को भी प्रोत्साहन स्वरूप उपहार दिए गए, जिससे उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई।
कार्यक्रम में शिशु रोग विभाग के अन्य डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भी भाग लिया। उन्होंने बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता और खेल गतिविधियों का आयोजन किया, जिससे बच्चों को खुशी का माहौल मिला। डॉ. अलका ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के मनोबल को बढ़ाते हैं और उन्हें बीमारी से लड़ने की प्रेरणा देते हैं।
डॉ. अलका ने आगे कहा कि बाल कैंसर के इलाज में परिवार का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा, “जल्दी निदान और सही इलाज से हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं।”
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अलका ने सभी प्रतिभागियों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और बच्चों के परिवारों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि समाज में बाल कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़े और कोई भी बच्चा इस बीमारी से अकेले न लड़े।
इस अवसर पर शिशु रोग विभाग की ओपीडी में एक प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें बाल कैंसर के लक्षण, इलाज और बचाव के तरीके दर्शाए गए थे।

