रोहतक जिला के ग्राम पहरावर (Pehrawar) भूमि से संबंधित एक महत्वपूर्ण भूमि अधिग्रहण मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अहम आदेश पारित किया गया।
एडवोकेट तुषार पाहवा ने बताया कि उक्त भूमि का अधिग्रहण सेक्टर-26, रोहतक के विकास हेतु किया गया था। यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग-10 (NH-10) पर स्थित है तथा इसके आसपास अनेक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान, टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स एवं टिलयार झील स्थित हैं, जिससे भूमि की व्यावसायिक एवं आवासीय संभावनाएं अत्यंत उच्च हैं।
वर्ष 2009 में भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, रोहतक द्वारा मुआवज़ा मात्र ₹20 लाख प्रति एकड़ निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध भूमि-मालिकों/किसानों द्वारा दायर संदर्भ याचिकाएं वर्ष 2014 में माननीय अतिरिक्त जिला न्यायाधीश (ADJ) द्वारा खारिज कर दी गईं। इसके पश्चात वर्ष 2022 में माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने मुआवज़ा बढ़ाकर 42,51,000 रुपए प्रति एकड़ किया।
उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा बढ़ा हुआ मुआवज़ा समय पर अदा नहीं किया गया, जिसके चलते भूमि-मालिकों/किसानों को निष्पादन याचिकाएँ दायर करनी पड़ीं। निष्पादन कार्यवाही में माननीय ADJ ने विभाग के बैंक खातों को कुर्क कर किसानों को मुआवज़े की राशि का वितरण सुनिश्चित कराया।
हालाँकि, भूमि-मालिक/किसान उच्च न्यायालय के निर्णय से भी आहत रहे, क्योंकि भूमि की उच्च व्यावसायिक क्षमता, NH-10 पर स्थित होना, तथा आसपास के विकसित संस्थानों को देखते हुए इसकी वास्तविक बाजार कीमत करोड़ों रुपये प्रति एकड़ है।
सभी तथ्यों, परिस्थितियों एवं भूमि की वास्तविक क्षमता को ध्यान में रखते हुए तथा भूमि-मालिकों/किसानों की ओर से उपस्थित अधिवक्ता तुषार पहवा द्वारा रखे गए विस्तृत तर्कों को सुनने के पश्चात, सर्वोच्च न्यायालय ने ओम प्रकाश एवं अन्य बनाम हरियाणा राज्य मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका को स्वीकार (admit) करते हुए हरियाणा सरकार एवं संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश से भूमि-मालिकों एवं किसानों को न्याय की दिशा में एक नई आशा प्राप्त हुई है और अब मामले की विस्तृत सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में की जाएगी।

