- रोहतक में हथियारों की गुप्त सप्लाई लाइन, पुलिस ने 16 दिन में 4 आरोपी पकड़े
कविता.रोहतक: पिछले 16 दिनों में पुलिस ने चार युवकों को अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। इन मामलों में कुल 5 देसी पिस्तौल और 4 जिंदा रौंद बरामद हुए हैं। गिरफ्तार युवकों में कबीर कॉलोनी का सोनू, सोनीपत के अहुलाना का अनुज, जसिया का प्रदीप और झज्जर के का मोहित शामिल हैं।
लगातार हो रही बरामदगी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर ये हथियार युवाओं तक पहुंच कौन रहा है और इसके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा है।
कौन बना रहा निशाना
इन चार मामलों में गिरफ्तार युवकों के पते अलग-अलग हैं, लेकिन इनके पास से अवैध हथियार बरामद होने की बात एक समान है। किसी के पास एक पिस्तौल मिला तो किसी के पास दो। पुलिस ने सभी मामलों में शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के बाद सवाल सिर्फ यह नहीं रह जाता कि हथियार लेकर घूम रहे युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि इन हथियारों की सप्लाई कहां से हो रही है और इन्हें युवाओं तक पहुंचाने वाला कौन है।
पिस्तौल बरामद, लेकिन सप्लायर तक पहुंचना बड़ी चुनौती
पुलिस की कार्रवाई में हथियार बरामद होना निश्चित तौर पर जांच की एक कड़ी है, लेकिन अवैध हथियारों की पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचना उससे आगे की चुनौती है। पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह पता लगाने की जरूरत होगी कि हथियार उन्होंने किससे लिए, मुलाकात कहां हुई, भुगतान किस माध्यम से हुआ और क्या इसी माध्यम से दूसरे युवकों तक भी हथियार पहुंचाए गए हैं। हाल के दिनों में हरियाणा के दूसरे जिलों में भी पुलिस की जांच अवैध हथियारों के स्रोत और बड़े नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित रही है।
क्या रोहतक में भी सक्रिय है कोई लोकल कड़ी
इन मामलों से फिलहाल किसी एक हथियार सप्लायर या गिरोह की भूमिका साबित नहीं होती, लेकिन लगातार बरामदगी के बीच पुलिस के सामने यह जांच का अहम सवाल जरूर है कि इन हथियारों के पीछे कोई स्थानीय कड़ी है या बाहर से हथियार रोहतक तक पहुंच रहे हैं। पुलिस अगर गिरफ्तार युवकों के मोबाइल संपर्क, पुराने आपराधिक रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संपर्क, लेन-देन और एक-दूसरे से संभावित कनेक्शन की जांच करे तो सप्लाई लाइन की तस्वीर साफ हो सकती है।
एक पिस्तौल से शुरू होती है बड़ी आपराधिक कहानी
अवैध हथियार का मिलना केवल शस्त्र अधिनियम का मामला बनकर खत्म नहीं होता। ऐसे हथियारों का इस्तेमाल आपराधिक वारदात, धमकी, रंगदारी या गैंग से जुड़े अपराधों में भी हो सकता है। हाल ही में पड़ोसी सोनीपत में अवैध हथियार और रंगदारी से जुड़े मामले में पुलिस ने आरोपियों से हथियारों के स्रोत और बड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ शुरू की थी। रोहतक में भी बरामद हथियारों की कड़ियां खंगालकर यह पता लगाना अहम होगा कि ये सिर्फ अलग-अलग मामलों में इस्तेमाल होने वाले हथियार हैं या इनके पीछे कोई संगठित सप्लाई चैन मौजूद है।
अब पुलिस के सामने असली टारगेट कौन
चार युवकों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कार्रवाई का अगला पड़ाव उन लोगों तक पहुंचना होना चाहिए, जिनसे ये हथियार मिले। पांच देसी पिस्तौल और चार रौंद की बरामदगी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि हथियार आए कहां से और पहुंचे किसके जरिए। अगर जांच गिरफ्तार युवकों से आगे बढ़कर हथियारों के स्रोत, सप्लायर, डिलीवरी चेन और संभावित खरीदारों तक पहुंचती है तो इस नेटवर्क की असली तस्वीर सामने आ सकती है।


