Wednesday, September 16, 2026
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साइबर ठगों के बदलते हथकंडे से सावधान! OTP नहीं मांग रहे ठग, अब सीधे मोबाइल में घुसने की कोशिश

रोहतक : साइबर ठग अब सिर्फ ओटीपी पूछकर खाते खाली नहीं कर रहे, बल्कि मोबाइल को ही अपना हथियार बना रहे हैं। रोहतक में सामने आए साइबर ठगी के नए तरीकों ने खतरे की तस्वीर और गंभीर कर दी है। कभी गैस कनेक्शन कटने का डर दिखाकर फर्जी APK डाउनलोड कराया जा रहा है तो कभी मोबाइल अपडेट के नाम पर भेजे गए लिंक से फोन का रिमोट एक्सेस हासिल करने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर कम समय में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर लोगों से लाखों रुपये निवेश करवाए जा रहे हैं। सोचिए, मोबाइल पर मैसेज आता है कि गैस का बिल जमा नहीं हुआ और अब आपका कनेक्शन काट दिया जाएगा। घबराकर आप मैसेज में दिए नंबर पर फोन करते हैं। सामने वाला आपका नाम और उपभोक्ता नंबर तक सही-सही बता देता है। भरोसा होते ही अगला कदम होता है कि एक ऐप डाउनलोड कर लीजिए, इसी से कनेक्शन चालू रहेगा। यहीं से असली खेल शुरू होता है।

रोहतक पुलिस के अनुसार, ठग अडानी गैस के नाम पर फर्जी मोबाइल ऐप की APK फाइल डाउनलोड करवाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐप फोन में इंस्टॉल होते ही मोबाइल की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और निजी जानकारी तक ठगों की पहुंच बन सकती है। इसके बाद बैंक खाते में जमा रकम पर भी खतरा मंडरा सकता है। इसलिए गैस कनेक्शन, बिजली, बैंक या किसी भी सरकारी/कंपनी सेवा के नाम पर भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड करना भारी पड़ सकता है।

मोबाइल अपडेट समझते रहे, पीछे से फोन पर कब्जे की कोशिश

आपके फोन का अपडेट पेंडिंग है, “Security Update Required” जैसे मैसेज देखकर अगर आप किसी अनजान लिंक पर क्लिक करते हैं तो सावधान हो जाइए। साइबर ठग व्हाट्सऐप या एसएमएस के जरिए लिंक अथवा APK भेज सकते हैं। लिंक खोलने पर स्क्रीन पर ऐसा माहौल बनाया जा सकता है, जैसे फोन में अपडेट इंस्टॉल हो रहा हो। लेकिन इस दौरान ठग रिमोट एक्सेस या दूसरे तरीके से मोबाइल तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। फोन में बैंकिंग ऐप, यूपीआई, फोटो, कॉन्टैक्ट और दूसरी निजी जानकारी होती है, इसलिए एक संदिग्ध ऐप सिर्फ फोन की समस्या नहीं बल्कि नुकसान का रास्ता बन सकता है। फोन अपडेट हमेशा मोबाइल की सेटिंग या आधिकारिक ऐप स्टोर के जरिए ही करें।

फेसबुक-व्हाट्सऐप पर करोड़पति बनाने का सपना

सोशल मीडिया पर इन दिनों निवेश के नाम पर भी बड़ा जाल बिछाया जा रहा है। फेसबुक, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर ऐसे ग्रुप या मैसेज सामने आ सकते हैं जिनमें कम समय में बड़ी कमाई का दावा किया जाता है। शुरुआत में छोटी रकम लगाने पर मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाए जा सकते हैं या शुरुआती निकासी की सुविधा देकर भरोसा बनाया जा सकता है। इसके बाद निवेश की रकम बढ़ाने के लिए दबाव बनाया जाता है। जब बड़ी रकम जमा हो जाती है तो ठग संपर्क बंद कर देते हैं। रोहतक पुलिस ने नागरिकों को ऐसी लुभावनी निवेश योजनाओं से दूर रहने की सलाह दी है। खासकर बिना जोखिम बड़ा मुनाफा जैसी पेशकश को खतरे की घंटी मानकर चलना चाहिए।

ठगों का नया हथियार ओटीपी नहीं, आपका मोबाइल बन रहा

साइबर ठगी का तरीका तेजी से बदल रहा है। पहले ठग बैंक अधिकारी बनकर ओटीपी और पिन पूछते थे, अब कोशिश यह रहती है कि व्यक्ति खुद ऐसी गलती कर दे जिससे ठगों को डिवाइस या जानकारी तक पहुंच मिल सके। APK डाउनलोड करवाना, अनजान लिंक खुलवाना, स्क्रीन शेयर करवाना या संदिग्ध ऐप को अनुमति दिलवाना इसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। मोबाइल में बैंकिंग और यूपीआई की सुविधा होने के कारण फोन सुरक्षित रखना अब बैंक खाते की सुरक्षा जितना ही जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई APK इंस्टॉल न करें और किसी को स्क्रीन शेयर या रिमोट एक्सेस न दें।

ठगी हो जाए तो पहले मिनट बेहद अहम

साइबर फ्रॉड का शिकार होने के बाद कई लोग पहले परिवार या परिचितों से बात करने लगते हैं और शिकायत करने में देर कर देते हैं। पुलिस की सलाह है कि ऐसी स्थिति में समय बर्बाद न करें। अगर खाते से रकम निकल गई है तो तुरंत बैंक को सूचना दें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

फोन हैक होने का अंदेशा है तो तुरंत मोबाइल का इंटरनेट बंद करें या SIM निकाल दें। जितनी जल्दी घटना की सूचना दी जाएगी, उतनी जल्दी संबंधित तंत्र के जरिए कार्रवाई की संभावना बनती है।

आज बुजुर्गों ने लिंक खोला तो कल बच्चों के फोन से भी खतरा

साइबर ठगी से बचाव सिर्फ खुद सतर्क रहने से नहीं होगा। घर के बुजुर्गों और बच्चों को भी समझाना जरूरी है कि बैंक, गैस, बिजली, नौकरी, निवेश या किसी सरकारी सेवा के नाम पर आए अचानक मैसेज पर तुरंत कार्रवाई न करें। पासवर्ड और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। कोई लिंक संदिग्ध लगे तो उसे खोलने के बजाय संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से जानकारी लें।

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