HOMRE लिमिटेड ने देश में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जुड़े प्रोजेक्ट्स—प्रोसेसिंग प्लांट्स—की शुरुआत की है।
यह प्रोजेक्ट्स एक सशक्त और एकीकृत सर्कुलर वैल्यू चेन विकसित करेंगे, जिसमें कच्चे माल के उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग और अंतिम उत्पादों के व्यावसायीकरण तक की पूरी प्रक्रिया शामिल होगी।
यह पहल भारत सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता के अनुरूप है। केंद्रीय बजट 2025 में बायोमास-आधारित परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन और नीति समर्थन की घोषणा की गई है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की एकीकृत परियोजनाएं भारत के महत्वाकांक्षी रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। साथ ही, ये पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगी। निवेश के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना आकर्षक मानी जा रही है।
भारत में बायोमास आधारित ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत नीतिगत समर्थन मिल रहा है, जिससे इसके तेजी से विस्तार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) के अनुसार, देश में बायोमास पावर की स्थापित क्षमता करीब 10 गीगावॉट है, जिसे दशक के अंत तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल सिर्फ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि Decarbonization रणनीति का अहम हिस्सा है। Union Budget 2025 India में बायोमास प्रोजेक्ट्स के लिए बढ़ी सब्सिडी और टैक्स लाभ का प्रस्ताव भी इस दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नीतिगत प्रोत्साहनों के चलते आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में निवेश, नवाचार और नई परियोजनाओं में तेजी आने की उम्मीद है।
बता दें कि भारत में आने वाले वर्षों में 28–30 गीगावॉट तक क्षमता विकसित होने की संभावना जताई गई है। बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के कारण सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, वहीं कृषि अवशेषों की उपलब्धता भी इस सेक्टर को मजबूती दे रही है। भारत सरकार ने भी कोयला आधारित पावर प्लांट्स में बायोमास को-फायरिंग को 5% से बढ़ाकर 7% करने का लक्ष्य रखा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
नई बायोमास प्रोसेसिंग प्लांट्स से ऊर्जा क्षेत्र में होगा व्यापक सुधार
नए प्रोसेसिंग प्लांट्स कच्चे बायोमास को बायोफ्यूल, बायो-बेस्ड केमिकल और ठोस बायोएनर्जी पेलेट्स में बदलेंगे। पायरोलिसिस, टॉरिफैक्शन और एनारोबिक डाइजेशन जैसी एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कन्वर्ज़न क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
2025 के सरकारी निर्देशों के अनुसार, हर प्लांट अधिक फीडस्टॉक क्षमता के साथ डिज़ाइन किया गया है और एडवांस प्रोसेस कंट्रोल के माध्यम से संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेगा।
निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर
वहीं इस परियोजना में निवेशकों के लिए भी बड़ा अवसर है। कंपनी के अनुसार, इस मॉडल से 30% से अधिक आंतरिक रिटर्न मिलने की संभावना है और 5 वर्षों में निवेश की भरपाई हो सकती है।
HOMRE लिमिटेड की यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

