हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) के संसाधन प्रबंधन एवं उपभोक्ता विज्ञान विभाग ने महिलाओं के लिए बेहतर और सुविधाजनक उत्पाद तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग ने हरियाणा की महिलाओं के शरीर से जुड़े विभिन्न मापों का एक व्यवस्थित डाटा तैयार किया है। इस डाटा रिपॉजिटरी के लिए विश्वविद्यालय को आधिकारिक कॉपीराइट भी मिला है। शोध का विषय ‘हरियाणा राज्य की महिलाओं के मानवमितीय आंकड़ों के रिपॉजिटरी के आधार पर मैनक्विन का डिजाइन एवं विकास’ था।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने कॉपीराइट मिलने पर शोधार्थी खुशबु व उनकी शोध सलाहकार डा. प्रोमिला कृष्णा चहल तथा विभागाध्यक्ष डा. किरण सिंह को बधाई दी। रिपॉजिटरी का उपयोग शोधकर्ता, डिजाइनर और उत्पाद बनाने वाली संस्थाएं, महिलाओं के लिए अधिक आरामदायक और उपयोगी सामान तैयार करने में कर सकती हैं। खासकर कृषि कार्यों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी को देखते हुए उनके लिए सही आकार और सुविधाजनक कृषि उपकरण विकसित करने में यह डाटा उपयोगी होगा। घरेलू कामों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के डिजाइन में भी इन आंकड़ों का उपयोग किया जा सकता है। इससे उपकरणों को महिलाओं के लिए इस्तेमाल करने में आसान और सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की अधिष्ठाता डॉ. मोनिका शर्मा ने बताया कि शोध के दौरान हिसार और फतेहाबाद जिलों की 18 से 21 वर्ष की ग्रामीण और शहरी महिलाओं के शरीर के 55 अलग-अलग माप लिए गए। इनमें महिलाओं की लंबाई, शरीर की चौड़ाई और परिधि, बैठने और खड़े होने की स्थिति तथा हाथ-पैरों से जुड़े माप शामिल हैं। शोध में लिए गए सभी आंकड़ों को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित किया गया है। इन आंकड़ों में महिलाओं की पहचान को सुरक्षित रखा गया है। तैयार की गई यह रिपॉजिटरी आगे होने वाले शोध और नए उत्पाद बनाने में काफी उपयोगी हो सकती है। इन आंकड़ों की मदद से भारतीय महिलाओं के शरीर के आकार और जरूरत के अनुसार कपड़े, फर्नीचर, जूते, कार्यस्थल और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले अन्य उत्पादों को बेहतर तरीके से डिजाइन किया जा सकता है। इसके अलावा, महिलाओं के लिए कृषि और घरेलू काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को भी अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने बताया कि यह शोध विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि महिलाओं के लिए बनाए जाने वाले कई उत्पादों का डिजाइन उनकी वास्तविक शारीरिक बनावट और जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाना जरूरी है। हकृवि द्वारा तैयार यह रिपॉजिटरी भविष्य में ऐसे महिला-केंद्रित उत्पादों के विकास में उपयोगी आधार उपलब्ध कराएगी। इस अवसर पर ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा व डॉ. योगेश जिंदल उपस्थित रहे।

