चंडीगढ़ : हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने बिजली बिलिंग से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई करते हुए बिजली वितरण निगमों की कार्यप्रणाली पर कड़ा संज्ञान लिया है और उपभोक्ताओं को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
अंबाला जिले से प्राप्त एक शिकायत की सुनवाई करते हुए आयोग ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) की बिलिंग प्रणाली में गंभीर खामी पाए जाने पर चिंता जताई। आयोग ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि बिलिंग सॉफ्टवेयर में मल्टीप्लाइंग फैक्टर 1 से कम होने के बावजूद 0.1 दर्ज कर लिया गया, जबकि विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह फैक्टर एक से कम नहीं हो सकता।
आयोग ने माना कि यदि सॉफ्टवेयर में मल्टीप्लाइंग फैक्टर की सीमा तय की गई होती तो सिस्टम 0.1 को स्वीकार ही नहीं करता। इस संबंध में आयोग ने चीफ इंजीनियर (आईटी), उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम को निर्देश दिए हैं कि वे यह स्पष्ट करें कि सिस्टम ने 1 के स्थान पर 0.1 को क्यों स्वीकार किया और इस त्रुटि को दूर करने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं या प्रस्तावित हैं।
आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि पूरे सिस्टम में एक ही क्वेरी के माध्यम से उन सभी बिलों की पहचान की जाए जिनमें मल्टीप्लाइंग फैक्टर एक से कम दर्ज हुआ है और ऐसे सभी मामलों में उपभोक्ताओं से किसी आवेदन की प्रतीक्षा किए बिना स्वतः सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट 25 मार्च 2026 तक आयोग की ई-मेल [email protected] पर भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले में राहत देते हुए आयोग ने कहा कि संबंधित उपभोक्ता आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से है। उपभोक्ता के परिवार का एक सदस्य गुजरात में प्रशिक्षु के रूप में कार्यरत है और लगभग 14 हजार रुपये प्रतिमाह कमाता है, इसलिए पूरा बकाया एकमुश्त देना संभव नहीं है।
आयोग ने अपने पूर्व आदेशों का उल्लेख करते हुए गलत या औसत बिलिंग के मामलों में निर्धारित मुआवजा नीति के अनुसार निर्णय सुनाया। आयोग के अनुसार 6 माह तक की गलत बिलिंग के मामलों में आवश्यकता अनुसार मुआवजा दिया जाएगा, जबकि 6 माह से अधिक की अवधि के लिए मुआवजा इस प्रकार निर्धारित है। 1 वर्ष तक की अवधि के लिए प्रति गलत बिलिंग 200 रुपये, 2 वर्ष तक की अवधि के लिए प्रति गलत बिलिंग 300 रुपये तथा 2 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए प्रति गलत बिलिंग 500 रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
इसी आधार पर आयोग ने सितंबर 2022 से जनवरी 2026 तक लगभग 20 बिलिंग चक्रों के लिए उपभोक्ता को प्रति बिलिंग चक्र 500 रुपये के हिसाब से मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। यह राशि उपभोक्ता के बिजली बिल में क्रेडिट की जाएगी। शेष बकाया राशि उपभोक्ता दो समान किस्तों में जमा कर सकेगा, जिसकी अनुमति संबंधित एसडीओ द्वारा दी जाएगी।
आयोग ने यह भी कहा कि गलत मल्टीप्लाइंग फैक्टर दर्ज करने के लिए संबंधित जूनियर इंजीनियर जिम्मेदार था, जिसका अब निधन हो चुका है। उपभोक्ता क्लर्क और कंज्यूमर असिस्टेंट द्वारा भी लंबे समय तक इस त्रुटि का पता नहीं लगाया जा सका। हालांकि कार्यभार को देखते हुए आयोग ने उन पर दंड लगाने से परहेज किया है और उपभोक्ता को मुआवजा दिए जाने के बाद मामले को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
इसी प्रकार हिसार जिले से जुड़े एक अन्य मामले में आयोग ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के अधिकारियों द्वारा सोलर मीटर की रीडिंग सिस्टम में गलत दर्ज किए जाने के कारण उपभोक्ता को हुई असुविधा और उत्पीड़न पर संज्ञान लिया। आयोग ने कहा कि मामले में आवश्यक राहत तो प्रदान कर दी गई थी, लेकिन निगम के अधिकारी द्वारा सोलर मीटर की रीडिंग दर्ज करते समय हुई गलती के कारण उपभोक्ता को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि यह प्रविष्टि संबंधित जूनियर इंजीनियर द्वारा की गई थी, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। हालांकि यह गलती निगम की ओर से हुई थी, इसलिए आयोग ने हरियाणा राइट टू सर्विस अधिनियम, 2014 की धारा 17(1)(ह) के तहत उपभोक्ता को 1,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

