रोहतक में प्रसिद्ध खरावड़ मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में गुरुवार को हनुमान जन्मोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस प मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ हुआ तो कहीं भंडारे का आयोजन किया गया।
वहीं माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री जी की कृपा से चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव धूमधाम और हर्षोल्लास से मना। पवन पुत्र हनुमान जी को आकर्षित लाइट व फूलों से सजाया गया था। प्रात : 9:00 बजे मुख्य अतिथि डॉ सतीश पूनिया (प्रभारी हरियाणा भाजपा ) द्वारा भक्तिभाव और श्रद्धापूर्वक ध्वजारोहण किया और हनुमान जी का गुणगान करते हुए झंडे को सलामी दी। भक्तों से जय श्री राम जय श्री राम के जयकारे लगाए ।
एडवोकेट पी.एन. कथूरिया ने मुख्य अतिथियों को हनुमान जी की प्रतिमा और स्मृति चिह्न भेंट किया । इस अवसर पर प्रदीप जैन, पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा, अजय बंसल, प्रदेश कोषाध्यक्ष भाजपा, रणबीर ढाका, जिलाध्यक्ष भाजपा, मनमोहन गोयल, पूर्व मेयर, राज कमल, सहगल, पूर्व डिप्टी मेयर, सौरव कुमार एडवोकेट स्थानीय पार्षद एवं भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद थे । तत्पश्चात पंडित अशोक शर्मा द्वारा प्रसाद वितरित हुआ। यह जानकारी सचिव गुलशन भाटिया ने दी।
कार्यक्रम में पिछले दो दिन से चल रहे रामायण पाठ की समाप्ति, श्री हनुमान जी का पूजन एवं कीर्तन और गुरुमां साध्वी मानेश्वरी देवी के प्रवचन हुए। इस अवसर पर हनुमान जी को 31 किलो का लड्डू और हनुमान जी का प्रिय 56 प्रकार के लाल मिष्ठान आहार का भोग लगाया गया जिसमें इमरती, चूरमा, गाजर का हलवा, मोतीचूर व गुड के लड्डू, आनार, पेठा आदि थे।

प्रभु हनुमान त्याग और समर्पण के प्रतीक: डॉ सतीश पूनिया
मुख्य अतिथि डॉ सतीश पूनिया ने कहा कि रामभक्त हनुमान को महावीर, बजरंगबली, पवन पुत्र, अंजनेय समेत कई नामों से पुकारा जाता है । हनुमान त्याग और समर्पण के प्रतीक के तौर पर जाने जाते हैं। कहा जाता है की भगवान हनुमान को अमर होने का वरदान प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि उनके चारित्रिक गुणों को थोड़ा सा भी उतारकर अपने जीवन को सफल किया जा सकता है।
वर्ष में दो बार आता हैं हनुमान महोत्सव : मानेश्वरी देवी

परमश्रद्धेया साध्वी मानेश्वरी देवी जी ने बताया कि हनुमान जी की पूजा से मनवांछित फल की होगी प्राप्ति होती है । हनुमान जी का जन्मोत्सव साल में दो बार मनाया जाता है। पहला चैत्र मास की पूर्णिमा, दूसरा कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी नरक चतुर्दशी के दिन। भगवान वाल्मीकि की रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को हुआ था। चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर भी हर साल हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है।
मान्यता है कि इस दिन अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म हुआ था। हनुमान जी को भगवान शंकर का अंश भी माना जाता है, इसलिए उन्हें शिवजी का रुद्रावतार भी कहा गया है। हनुमान जन्मोत्सव पर विधिवत पूजा-अर्चना से बजरंगबली को प्रसन्न किया जा सकता है।

