Thursday, April 3, 2025
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रोहतक पहुंची गोल्ड मेडलिस्ट पहलवान नीतिका, बजरंग-विनेश को छूट पर हुई नाराज

पिता दयानंद ने कहा कि उनकी तीन बेटियां ही हैं और उन्होंने कभी ये नहीं माना कि उनका कोई बेटा नहीं है और बेटियों को बेटों की तरह पाला है। आज उनकी बेटी ने उनका सपना पूरा कर दिया जो वह पहलवान रहते हुए नहीं कर पाए थे। उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी का भविष्य में भी ऐसे ही प्रदर्शन करे।

रोहतक। रोहतक के गांव मोखरा की बेटी नीतिका रेसलिंग में अपने दांव पेंच से जिले का नाम रोशन कर दिया है। नीतिका ने जॉर्डन में हुई अंडर-20 एशियन चैंपियनशिप कुश्ती प्रतियोगिता में 59 किलोग्राम भार वर्ग में उज्बेकिस्तान की पहलवान को हराकर गोल्ड मेडल जीता। गुरुवार को नीतिका का घर लौटने पर भव्य स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने देश का नाम रोशन करने वाली नीतिका को सिर आँखों पर बैठाया।

नीतिका ने अपनी इस जीत का श्रेय अपने कोच, परिवार और अपनी मेहनत को दिया। इस बीच वह विनेश फोगाट और बजरंग पूनिया को ट्रायल में दी गई छूट पर नाखुश दिखीं। उनका कहना है कि सभी को बराबर मौका मिलना चाहिए। कोच भी बोले एडहॉक कमेटी का फैसला गलत है और यह खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ने वाला है। नीतिका का कहना है कि जो बच्चे चार पांच साल से प्रैक्टिस कर ओलिंपिक में मेडल जीतने का सपना देखते हैं, उनके लिए यह फैसला हताशा भरा है।

सभी पहलवानों को बराबर का मौका मिलना चाहिए और ट्रायल लेने के बाद ही किसी भी चैंपियनशिप के लिए खिलाड़ी का चयन होना चाहिए। जो फैसला बजरंग पूनिया व विनेश फोगाट के लिए दिया गया है वह सरासर गलत है। उनका कहना है कि आज वे अपनी इस जीत को लेकर काफी खुश हैं और अब विश्व चैंपियनशिप तथा ओलिंपिक के लिए अपनी तैयारियां करेंगी।

नीतिका के कोच अपनी शागिर्द के गोल्ड मेडल जीतने पर काफी खुश हैं। लेकिन विनेश फोगाट और बजरंग पुनिया को ट्रायल में दी गई छूट को लेकर वे काफी नाराज भी हैं। उनका कहना है कि यह जूनियर खिलाड़ियों के मनोबल को तोड़ने वाला फैसला है। सभी को बराबर का हक मिलना चाहिए और जो ट्रायल में जीतकर जाए उसके साथ पूरा देश खड़ा होता है। इसलिए वे अपील करते हैं कि इस फैसले को बदला जाए। ताकि जूनियर खिलाड़ियों को भी मौका मिल सके।

पिता दयानंद ने कहा कि उनकी तीन बेटियां ही हैं और उन्होंने कभी ये नहीं माना कि उनका कोई बेटा नहीं है और बेटियों को बेटों की तरह पाला है। आज उनकी बेटी ने उनका सपना पूरा कर दिया जो वह पहलवान रहते हुए नहीं कर पाए थे। उन्हें उम्मीद है कि उनकी बेटी का भविष्य में भी ऐसे ही प्रदर्शन करे।

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