Monday, July 6, 2026
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रोहतक की तस्वीर बिगाड़ रहा कूड़ा, शहरभर में बन गए अवैध डंपिंग जोन

कविता.रोहतक : स्वच्छ शहर का सपना रोहतक में लोगों की लापरवाही के आगे दम तोड़ता नजर आ रहा है। शहर के पॉश इलाकों से लेकर पुराने बाजारों तक, सड़कों के किनारे और खाली प्लॉटों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं।

सेक्टर-1, सेक्टर-2, सेक्टर-3 पार्ट, सोनीपत रोड और पुराने शहर के कई हिस्सों में लोगों ने अपनी सुविधा के अनुसार कूड़ा फेंककर स्थायी डंपिंग जोन बना दिए हैं। इससे न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर निगम लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है, लेकिन लोगों की आदतों में बदलाव नहीं दिख रहा।

पॉश कॉलोनियों से पुराने शहर तक हर जगह फैला कचरा

रोहतक में अब शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो जहां सड़क किनारे या खाली जगह पर कूड़े का ढेर दिखाई न देता हो। पॉश माने जाने वाले सेक्टर-1 में भी लोग खुले में कूड़ा फेंक रहे हैं। सेक्टर-2 और सेक्टर-3 पार्ट की मुख्य सड़क, सोनीपत रोड, पुराने शहर की गलियां और कई आवासीय क्षेत्र भी इसी समस्या से जूझ रहे हैं। घरों और दुकानों का कचरा निर्धारित स्थानों पर डालने के बजाय लोग जहां जगह मिली, वहीं फेंककर आगे बढ़ जाते हैं।

बदबू, धूल और धुएं से बढ़ रहा बीमारियों का खतरा

सड़क किनारे जमा कूड़ा धीरे-धीरे सड़ने लगता है, जिससे बदबू फैलती है और मक्खी-मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। कई जगह लोग कूड़े में आग लगा देते हैं, जिससे जहरीला धुआं निकलता है और आसपास की हवा प्रदूषित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हालात सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी और संक्रमण का खतरा बढ़ाते हैं। बरसात के मौसम में यही कचरा नालियां जाम कर जलभराव की समस्या को भी बढ़ा देता है।

निगम की मेहनत पर लोगों की लापरवाही भारी

नगर निगम की ओर से नियमित सफाई, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। कई स्थानों पर लोगों को खुले में कूड़ा न फेंकने की अपील भी की जाती है। इसके बावजूद कुछ लोग नियमों की अनदेखी कर सार्वजनिक स्थानों को ही कूड़ाघर बना रहे हैं। नतीजा यह है कि सफाई कर्मियों के रोजाना कचरा उठाने के बाद भी कुछ ही घंटों में वही स्थान फिर गंदगी से भर जाते हैं।

शहर की छवि पर पड़ रहा नकारात्मक असर

सड़कों के किनारे फैला कचरा केवल गंदगी ही नहीं फैलाता, बल्कि शहर की पहचान को भी नुकसान पहुंचाता है। बाहर से आने वाले लोगों पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है। साफ-सुथरे और व्यवस्थित शहर की जगह रोहतक की पहचान गंदगी से जुड़ने लगी है। कई स्थानों पर कूड़े के ढेर के कारण आवारा पशु भी जमा रहते हैं, जिससे यातायात और राहगीरों के लिए भी परेशानी पैदा होती है।

जनभागीदारी के बिना स्वच्छता अभियान अधूरा

लोगों का मानना है कि केवल नगर निगम के प्रयासों से शहर को स्वच्छ नहीं बनाया जा सकता। जब तक नागरिक स्वयं जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक सफाई अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो पाएगा। घरों और दुकानों का कचरा निर्धारित स्थान पर डालना, सार्वजनिक जगहों पर गंदगी न फैलाना और आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि लोग अपनी आदतों में बदलाव लाएं, तभी रोहतक वास्तव में स्वच्छ और स्वस्थ शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेगा।

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