Tuesday, January 13, 2026
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Fish Farming : हरियाणा अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा 

Fish Farming : हरियाणा के मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने राज्य में अंतर्देशीय मत्स्य पालन की तेज विकास दर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हरियाणा देश के प्रमुख भूमि-आबद्ध (लैंडलॉक्ड) मछली उत्पादक राज्यों में से एक बनकर उभरा है। राज्य ने 23,850 हेक्टेयर जल क्षेत्र से कुल 2.04 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया है।

हैदराबाद में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के मत्स्य पालन सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि हरियाणा ने 166 करोड़ मछली बीज (फिश सीड्स) का उत्पादन किया है, जो राज्य की मत्स्य पालन संरचना और वैज्ञानिक प्रथाओं के मजबूत होने को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि भूमि-आबद्ध राज्यों में पंजाब मछली उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जबकि हरियाणा दूसरे स्थान पर है, भले ही राज्य की कोई तटरेखा न हो।

मत्स्य पालन मंत्री ने कहा कि हरियाणा में भूमि-आबद्ध राज्य तालाब-आधारित और अंतर्देशीय जल मत्स्य पालन के माध्यम से भारत के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, लेकिन तटीय राज्यों की तुलना में इन्हें कम वित्तीय सहायता मिलती है, जिसका सीधा असर मछली पालकों और राज्य के जीडीपी पर पड़ता है।

मत्स्य पालन मंत्री ने सम्मेलन में बताया कि हरियाणा मत्स्य पालन को वैकल्पिक आजीविका के रूप में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। कई किसान पारंपरिक कृषि से बेहतर लाभ के कारण मछली पालन की ओर परिवर्तित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मछली पालन ने फसल अवशेष प्रबंधन की समस्या, विशेष रूप से पराली जलाने की समस्या में भी मदद की है, क्योंकि यह किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत प्रदान करता है।

उन्होंने कहा कि बीज गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए हरियाणा ने सभी जिलों में ब्लॉक स्तर पर मछली बीज बैंक सुनिश्चित किए हैं। भुवनेश्वर के सिफा से आनुवंशिक रूप से सुधारित मछली प्रजातियां प्राप्त की गई हैं, जिससे राज्य उच्च गुणवत्ता वाले ब्रुड स्टॉक का उत्पादन कर रहा है और समग्र उत्पादकता में सुधार हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मछली बीज प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय दिशा निर्देश और योजनाएं जारी करने का आग्रह किया ताकि सभी राज्यों में गुणवत्ता वाले बीज की एकसमान उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।

मत्स्य पालन मंत्री ने संरचना विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मछली पालकों और उद्यमियों को दिल्ली की गाजीपुर और आजादपुर मंडियों की तर्ज पर सोनीपत के गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट में समर्पित स्थान प्रदान किया गया है।

श्याम सिंह राणा ने केंद्र सरकार के समक्ष कई प्रस्ताव रखे, जिनमें फरीदाबाद, गुरुग्राम, हिसार, यमुनानगर और पंचकूला में आधुनिक थोक मछली बाजार स्थापित करना शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत 300 करोड़ रुपये है। साथ ही करनाल में मछली प्रसंस्करण इकाई और सिरसा में झींगा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव है, जिसमें लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश होगा। उन्होंने बताया कि हरियाणा पंचकूला में विश्व स्तरीय एक्वेरियम हाउस बनाने की भी कल्पना कर रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 1,000 करोड़ रुपये है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम के गांव सुल्तानपुर में पांच एकड़ भूमि राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने के लिए हस्तांतरित की गई है, जो हरियाणा और पड़ोसी राज्यों को लाभ पहुंचाएगा। उन्होंने अधिक नीतिगत समर्थन की मांग करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्रालय से 2026-27 वित्तीय वर्ष में भूमि-आबद्ध राज्यों पर विशेष ध्यान देने और उनकी विशिष्ट चुनौतियों को संबोधित करने के लिए हरियाणा में एक विशेष राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने पर विचार करने का आग्रह किया।

उन्होंने हरियाणा में मत्स्य पालन हेतू बढ़ा हुआ बजटीय समर्थन प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के प्रति आभार व्यक्त किया और केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह के निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

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