Monday, July 13, 2026
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एमडीयू में ‘जाम’ का खेल! बोतलों ने खोल दी सुरक्षा की हकीकत

  • बीयर की बोतलें बनीं सुरक्षा व्यवस्था की ‘टेस्ट रिपोर्ट’

कविता. रोहतक :महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) के गर्ल्स हॉस्टल के पीछे बीयर की खाली बोतलें मिलने का मामला केवल सफाई या अनुशासन का नहीं है। यह सीधे तौर पर यूनिवर्सिटी की सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी और कैंपस मैनेजमेंट पर सवाल खड़े करता है। यदि शिक्षा के परिसर में शराब पहुंच रही है तो यह केवल नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं, बल्कि भविष्य में किसी बड़ी घटना की आशंका का भी संकेत हो सकता है।

एमडीयू परिसर में बाहरी लोगों और वाहनों की एंट्री निर्धारित नियमों के तहत होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि बीयर की बोतलें कैंपस तक कैसे पहुंचीं। क्या किसी ने बैग या वाहन में शराब लाकर अंदर पहुंचाई, या फिर परिसर के किसी दूसरे रास्ते का इस्तेमाल किया गया? इस पूरे मामले की जांच से ही हकीकत सामने आ सकती है।

सिर्फ गेट पर गार्ड काफी नहीं

बड़े विश्वविद्यालयों में सुरक्षा केवल मुख्य गेट तक सीमित नहीं रहती। हॉस्टल क्षेत्र, सुनसान हिस्सों और पीछे के रास्तों पर भी नियमित गश्त जरूरी होती है। यदि ऐसी जगहों पर निगरानी कमजोर हो तो असामाजिक तत्व आसानी से वहां पहुंच सकते हैं। सुरक्षा व्यवस्था का मतलब केवल प्रवेश रोकना नहीं, बल्कि पूरे कैंपस पर लगातार नजर रखना भी है।

गर्ल्स हॉस्टल के आसपास अतिरिक्त सतर्कता हो

जिस स्थान का वीडियो वायरल हुआ, वह गर्ल्स हॉस्टल के पीछे का इलाका बताया जा रहा है। ऐसे क्षेत्र में किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि गंभीर चिंता का विषय है। छात्राओं की सुरक्षा को देखते हुए इस क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी, बेहतर लाइटिंग और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी की जरूरत महसूस होती है।

ऑडिट जरूरी, मजबूत होगी सुरक्षा

देश के कई विश्वविद्यालयों में रात के समय मोबाइल पेट्रोलिंग, डिजिटल विजिटर एंट्री, बैग चेकिंग, संवेदनशील स्थानों पर हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी और सुरक्षा ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं। एमडीयू भी समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट कर कमजोर बिंदुओं की पहचान कर सकता है, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी तय हो

केवल खाली बोतलें उठाकर मामला खत्म नहीं होगा। यह पता लगाना जरूरी है कि शराब कैंपस में किसने पहुंचाई, कहां पी गई और सुरक्षा व्यवस्था में चूक किस स्तर पर हुई। यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इससे न केवल अनुशासन मजबूत होगा बल्कि छात्रों और अभिभावकों का विश्वविद्यालय पर भरोसा भी कायम रहेगा।

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