चंडीगढ़ : हरियाणा के स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक द्वारा राज्य के सभी सिविल सर्जनों और प्रधान चिकित्सा अधिकारियों को सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाओं का रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने इस बारे में निर्देश जारी करते हुए जिला नागरिक अस्पतालों में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाओं के सुचारू संचालन एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
महानिदेशक के अनुसार, राज्य के जिला नागरिक अस्पतालों में वर्ष 2016 से सीटी स्कैन और एमआरआई सेवाएं पीपीपी मॉडल के तहत संचालित हो रही हैं। इन सेवाओं का लाभ बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीज प्रतिदिन उठा रहे हैं। वर्तमान में ये सुविधाएं बीपीएल कार्ड धारकों, दिव्यांग भत्ता प्राप्त करने वाले व्यक्तियों, अनुसूचित जाति वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), लावारिस सड़क दुर्घटना पीड़ितों, हरियाणा सरकार के कर्मचारियों, पेंशनरों एवं उनके आश्रितों तथा एचआईवी से पीड़ित व्यक्तियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा है कि इन सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने और उचित रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि संबंधित श्रेणी के किसी भी मरीज को जांच की सलाह दिए जाने पर उसका इंडोर एडमिशन या डे-केयर फाइल अवश्य बनाई जाए। साथ ही, मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लैब जांच, जांच की आवश्यकता, तथा मरीज की सहमति जैसी सभी जानकारी को उपचार कर रहे डॉक्टर द्वारा फाइल में दर्ज किया जाना अनिवार्य होगा।
इसके अतिरिक्त, रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर (RMO) को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन इन जांचों से संबंधित आदेशों की जांच करें और संबंधित मेडिकल सुपरिटेंडेंट (MS) या प्रधान चिकित्सा अधिकारी (PMO) द्वारा इनकी पुष्टि (काउंटरसाइन) सुनिश्चित करें।
स्वास्थ्य सेवाएं के महानिदेशक ने सभी अधिकारियों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश देते हुए इसे अत्यंत आवश्यक एवं तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है।

