- 15 सितंबर से इलाज बंद करने की चेतावनी
- रोहतक के 34 निजी अस्पताल रहेंगे हड़ताल पर
- सरकार पर करीब 250 करोड़ रुपये बकाया
कविता. रोहतक : हरियाणा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर निजी अस्पतालों और सरकार के बीच चल रहा विवाद अब बढ़ गया है। लंबित भुगतान को लेकर प्रदेश के निजी अस्पतालों ने 1 सितंबर को एक दिन की हड़ताल का फैसला लिया है। इस दौरान आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित रहेंगी।
रोहतक में भी आयुष्मान योजना के पैनल में शामिल करीब 34 निजी अस्पताल इस हड़ताल में शामिल होंगे। निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार की ओर से लंबे समय से उनके भुगतान अटके हुए हैं। अकेले रोहतक के आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों का करीब 250 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है।
एक दिन की हड़ताल से सरकार को चेतावनी
आईएमए के जिलाध्यक्ष डॉ. रवींद्र हुड्डा ने कहा, निजी अस्पतालों ने फिलहाल मरीजों का इलाज अनिश्चितकाल के लिए बंद करने के बजाय 1 सितंबर को एक दिन की हड़ताल का निर्णय लिया है।
वहीं अस्पताल संचालकों का कहना है कि यह हड़ताल सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने और लंबित भुगतान के मुद्दे पर गंभीरता से कार्रवाई कराने के लिए की जा रही है। उनका कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को कैशलेस इलाज उपलब्ध कराने के बाद अस्पतालों को सरकार की ओर से भुगतान किया जाता है। लेकिन लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण अस्पतालों की आर्थिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। अस्पतालों को कर्मचारियों के वेतन, दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और दूसरे जरूरी खर्चों का भुगतान करना पड़ता है।
रोहतक के 34 अस्पताल आंदोलन में शामिल
रोहतक जिले में करीब 34 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इन अस्पतालों पर भी भुगतान लंबित होने का असर पड़ रहा है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि वे लंबे समय से योजना के तहत मरीजों को इलाज उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन समय पर भुगतान नहीं मिलने से अब स्थिति गंभीर हो गई है। अस्पतालों के मुताबिक करीब 250 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार की तरफ लंबित है। यही वजह है कि रोहतक के निजी अस्पताल भी प्रदेश स्तर पर होने वाली हड़ताल में शामिल हो रहे हैं। अस्पताल संचालकों का कहना है कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है, बल्कि सरकार को लंबित भुगतान के मुद्दे पर जल्द फैसला लेने के लिए मजबूर करना है।
15 सितंबर से इलाज बंद करने की चेतावनी
निजी अस्पतालों ने सरकार को फिलहाल राहत का एक मौका दिया है। 1 सितंबर की एक दिन की हड़ताल के बाद यदि सरकार और अस्पताल संचालकों के बीच कोई समाधान निकलता है और लंबित भुगतान को लेकर ठोस कदम उठाया जाता है तो आगे की स्थिति टल सकती है। लेकिन यदि हड़ताल के बाद भी बकाया भुगतान का समाधान नहीं हुआ तो निजी अस्पतालों ने 15 सितंबर से आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने की चेतावनी दी है। ऐसे में 1 सितंबर की हड़ताल को सरकार के लिए एक तरह का अल्टीमेटम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि सरकार और निजी अस्पतालों के बीच बातचीत से कोई रास्ता निकलता है या मामला 15 सितंबर तक पहुंचता है।
मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी
15 सितंबर से निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद हुआ तो इसका सीधा असर योजना के लाभार्थियों पर पड़ सकता है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के साथ-साथ हार्ट, किडनी, कैंसर और दुर्घटना जैसे मामलों में इलाज की जरूरत वाले मरीजों के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है।
आयुष्मान योजना के तहत पात्र परिवारों को निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। ऐसे में निजी अस्पतालों में इलाज बंद होने की स्थिति में मरीजों को सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है। पहले से मरीजों का दबाव झेल रहे सरकारी अस्पतालों पर भी अतिरिक्त भार बढ़ने की आशंका है।
निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि वे आयुष्मान मरीजों का इलाज रोकना नहीं चाहते, लेकिन भुगतान लंबित रहने की स्थिति में योजना को जारी रखना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। अब 1 सितंबर की एक दिन की हड़ताल के बाद सरकार क्या कदम उठाती है, इसी पर आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों में इलाज की आगे की स्थिति निर्भर करेगी।


