Chaitra Navratri : रोहतक में नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे और शैलपुत्री की विधिवत पूजा अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
वहीं माता दरवाजा स्थित संकट मोचन मंदिर में ब्रह्मलीन गुरुमां गायत्री जी के सानिध्य में चैत्र नवरात्र वीरवार को भक्तिभाव, हर्षोल्लास और धूमधाम से आरंभ हुए। गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी देवी और भक्तों ने वीरवार को माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना श्रद्धा से आरंभ की। उन्होंने हिंदू नव वर्ष (नव संवत्सर 2083) की भी शुभकामनाएं भक्तों को दी ।
साध्वी मानेश्वरी देवी ने विधिनुसार व मंत्रोच्चारण के साथ माँ दुर्गा के दरबार में प्रात: शुभ मुहुर्त अनुसार कलश स्थापना व खेतरी बीजी। तत्पश्चात अखंड ज्योत प्रज्जवलित की गई। कार्यक्रम में निरंतर 19 मार्च से 27 मार्च तक निरंतर नौ दिन तक चौबीस घंटे माँ की अखंड ज्योत जलेगी, अखंड पाठ होगा। प्रतिदिन सायं 4 से 6 दुर्गा स्तुति का पाठ और साध्वी जी के प्रवचन होंगे। अखंड ज्योत के दर्शन प्रात: 5 से 12 बजे और सायं 5 से 8 बजे तक दर्शन करेंगे। तत्पश्चात सत्संग, आरती तथा पंडित अशोक शर्मा द्वरा प्रसाद वितरित हुआ । मंदिर परिसर जय माता दी के जयकारों से गूंज उठा भक्तों ने नारियल की भेंट, लाल चुनरियां ओढ़ाकर, जल, गंगाजल, फूल-मालाओं, फल-फ्रूट, चंदन, पान सुपारी से मां की पूजा अर्चना कर सुख-समृद्धि, शांति व खुशहाली की मंगलकामनाएं मांगी और मां के जयकारे लगाए। श्रद्धालुओं में नवरात्र महोत्सव का काफी उत्साह था। मंदिर परिसर जय माता दी और जय माँ जगदंबे के जयकारों से गूंज उठा और माँ के भजनों पर नाचते-गाते हुए भक्ति के रस में डूबे नजर आए। माँ का दरबार, मंदिर और देवी देवताओं की प्रतिमाएं आकर्षित रंगबिरंगी लाइटों से सजाई गई थी।
सुख-समृद्धि की प्रतीक है मां शैलपुत्री : साध्वी मानेश्वरी देवी
गद्दीनशीन साध्वी मानेश्वरी देवी ने प्रवचन देते हुए कहा कि मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं। शैल का अर्थ है पत्थर या पहाड़। मां शैलपुत्री की कथा का श्रवण करने से व्यक्ति को जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में उनके नाम की तरह स्थिरता बनी रहती है, जीवन में अडिग रहकर लक्ष्य की प्राप्ति की जा सके। मां का वाहन वृषभ (बैल) है और मां शैलपुत्री पर्यावरण एवं प्रकृति संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। माता इतनी दयालु हैं कि वह निरंतर भक्तों का कल्याण करती हैं। वह अपने भक्तों को निरंतर अपनी कृपा से निहाल करती रहती हैं।

