Rohtak : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा कैंलम्मडीबी नामक एक उन्नत बायोइनफॉर्मेटिक्स डेटाबेस विकसित किया गया है। यह डेटाबेस कैंसर रोधी दवाओं के प्रतिरक्षा तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों से संबंधित वैज्ञानिक, प्रायोगिक रूप से प्रमाणित और मैन्युअली क्यूरेटेड जानकारी उपलब्ध कराता है।
इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. राजबीर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में डीन, यूआईईटी प्रो. सोनिया एवं शोधार्थी परवीन पुनिया ने अपनी टीम द्वारा विकसित कैंलम्मडीबी की संरचना, कार्यप्रणाली और शोध उपयोगिता का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। यह बहु-संस्थागत शोध कार्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों के सहयोग से संपन्न हुआ है। इसमें न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ मेडिसिन से डॉ. सलमान सादुल्लाह उस्मानी, ब्राजील की यूनिवर्सिटी ऑफ फ़ोर्टालेज़ा से प्रो. प्लासिडो रोजेरियो पिन्हेरो, एमएआईटी, नई दिल्ली से डॉ. आशीष खन्ना, एनआईएमआर, नई दिल्ली से डॉ. मीनू कलकल तथा उद्योग साझेदार ग्रोदिए टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बैठक के दौरान कैंलम्मडीबी को कैंसर अनुसंधान और बायोइनफॉर्मेटिक्स के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय वैज्ञानिक संसाधन बताया गया। यह डेटाबेस स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि विभिन्न कैंसर रोधी दवाएं प्रतिरक्षा तंत्र के अलग-अलग घटकों को किस प्रकार प्रभावित करती हैं। यह संसाधन विशेष रूप से कैंसर इम्यूनोथेरेपी, ड्रग डिस्कवरी और प्रतिरक्षा-आधारित उपचार रणनीतियों पर कार्य कर रहे शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। विशेष बात यह है कि कैंलम्मडीबी महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक द्वारा विकसित पहला व्यापक और समर्पित कैंसर अनुसंधान डेटाबेस है, जो विश्वविद्यालय के शोध क्षमताओं को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाता है।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि कैंलम्मडीबी को वैश्विक शोध समुदाय के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ओपन साइंस, सहयोगात्मक अनुसंधान और अकादमिक प्रगति को प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि शीघ्र ही इस संसाधन को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर होस्ट किया जाएगा, ताकि इसकी पहुँच और प्रभाव को और अधिक बढ़ाया जा सके। कैंलम्मडीबी के माध्यम से वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और विद्यार्थियों को प्रतिरक्षा-संबंधित दवा डेटा तक त्वरित और विश्वसनीय पहुँच प्राप्त होगी, जिससे कैंसर उपचार, नवाचार और ट्रांसलेशनल रिसर्च को मजबूती मिलेगी।
बैठक में डीन एकेडमिक अफेयर्स प्रो. सुरेश चंद्र मलिक, प्रो. के.के. शर्मा, एसोसिएट डीन (आर एंड डी), डॉ. राजीव कपूर और डॉ. दीपक छाबड़ा, डिप्टी डायरेक्टर, सेंटर फॉर आईपीआर स्टडीज, डॉ. जी.पी. सरोहा, निदेशक, यूसीसी तथा विकास नागिल, सिस्टम एनालिस्ट सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षाविद उपस्थित रहे।

