गुस्ताखी माफ़ हरियाणा – पवन कुमार बंसल: खाकी का नाम सुनते ही अच्छे -अच्छे की रूह कंपनी लगती है और ऐसे में एक पुलिस अफसर द्वारा अपने अनुभवों पर लिखी किताब ‘खाकी में इंसान ‘ सामने आये तो एक बार अजीब लगता है लेकिन ज्योही किताब के पन्ने पलटने शुरू किये तो सारी भ्रान्ति दूर हो गयी। लेखक हरियाणा के रहने वाले है और आजकल उत्तराखंड में डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस है लेकिन इसके अलावा वे एक अच्छे इंसान पहले है।
परसो कूरियर से उन द्वारा भेजी उनकी किताब मिली तो इतनी रोचक लगी की आधे घंटे में ही सारी पढ़ डाली और सोचा अपने पाठको से शेयर करू। वैसे हरियाणा में मेरे कई दोस्त पुलिस अफसरों ने किताबे लिखी है लेकिन अपने तरिके की शायद यह पाली किताब है जिसमे लेखक ने अपने अनुभव के आधार पर पुलिस वयस्था की सच्ची कहानियों का वर्णन है और मुझे उम्मीद है की इसे पढ़कर पुलिस अफसर प्रेरणा लेंगे।
बी पी आर एंड डी गृह मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा गोबिंद बल्ल्भ पंत पुरस्कार से सम्मानित अशोक कुमार ने आई आई टी ,दिल्ली से बी टेक और एम टेक की शिक्षा प्राप्त की। प्राक्थन में अशोक लिखते है ‘अत्यंत उत्साह से भरा ट्रेनिंग के लिए राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी मसूरी पहुंचे तो मुझे अपने आदर्शों के कई मिथक ढहते हुए नजर आए और धक्का सा लगा लेकिन जल्दी ही सम्हल गया और अपने इरादों को कमजोर नहीं होने दिया , अपने पुरे करियर में मेरी पूरी कोशिस रही है की में प्रत्येक पीड़ित की समस्या को ध्यान से सुनू ,उसकी पीढा को इंसान के नजरिये से महसूस करू और
उसको थानों एवं कोर्ट कहचरी के अनावश्यक दाव -पेंचो में फसने से बचाकर जल्दी से जल्दी न्याय दिलवाऊ।
“किताब में लेखक ने कुछ वास्तविक घटनाओं पर आधारित कहानियों के जरिये यह दर्शाने का प्रयास किया है की अच्छी पुलिस व्यवस्था से सचमुच गरीब और मजबूर लोगो की जिंदगी में फर्क लाया जा सकता है। किताब के बारे पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश प्रकाश सिंह की टीपणी। ‘खाकी में इंसान एक पुलिस अधिकारी द्वारा लिखी गयी एक बेहतरीन पुस्तक है। अपने अनुभव के आधार पर लिखी ये अध्भुत कहानिया पुलिस की मानवता और दयालुता को दिखाती है। ‘किताब आमजन पर उपलब्ध है।