रोहतक : उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय नागरिक अस्पताल स्थित मनोरोग एवं नशा मुक्ति केंद्र में मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन शुरू की गई है। इस हेल्पलाइन नंबर 8295474838 पर सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 से शाम 3 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। नागरिक मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, क्योंकि स्वस्थ मन ही स्वस्थ जीवन का आधार है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के बारे में परामर्श के लिए 14416 टेली मानस हेल्पलाइन सप्ताह के सातों दिन व 24 घंटे संचालित की जा रही है।
सचिन गुप्ता ने कहा है कि इस हेल्पलाइन पर नागरिकों को संपर्क करने पर स्वास्थ्य विभाग के मनोचिकित्सक एवं प्रशिक्षित काउंसलरों द्वारा उचित परामर्श, उपचार एवं मार्गदर्शन की सुविधा प्रदान की जा रही है। तनाव, चिंता, अनिद्रा, अवसाद अथवा किसी भी मानसिक परेशानी से पीड़ित व्यक्ति बिना किसी भय या संकोच के मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन से सहायता प्राप्त कर सकता है।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा है कि तीव्र गति से बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सामाजिक-आर्थिक दबावों के कारण तनाव आज एक सामान्य किंतु गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कार्यालय का अत्यधिक काम, पारिवारिक दायित्व, बेरोजगारी व आर्थिक अस्थिरता, मोबाइल व सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता, नींद की कमी तथा सामाजिक अलगाव जैसे कारण व्यक्ति के मानसिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। इन सभी के दृष्टिगत नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के उद्देश्य से मेंटल हेल्थ हेल्पलाइन शुरू की गई है।
सचिन गुप्ता ने कहा है कि यदि किसी नागरिक के जीवन में लंबे समय तक तनाव बना रहे, तो यह चिंता विकार, अवसाद, चिड़चिड़ापन, घबराहट, आत्मविश्वास की कमी, अनिद्रा, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, पाचन संबंधी समस्याएं तथा नशे की लत जैसी गंभीर मानसिक और शारीरिक बीमारियों का रूप ले सकता है। दुर्भाग्यवश, आज भी समाज में मानसिक रोगों को लेकर संकोच और मिथक मौजूद हैं, जिसके कारण लोग समय पर सहायता नहीं ले पाते।
तनाव से निपटने के लिए यह भी हैं अत्यंत लाभकारी
रोजमर्रा की जिंदगी में तनाव से बचने के लिए नियमित योग, ध्यान व प्राणायाम के अलावा प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक व्यायाम, संतुलित आहार व पर्याप्त नींद (कम से कम 7-8 घंटे), सीमित स्क्रीन टाइम व मोबाइल से दूरी, सकारात्मक सोच व समय प्रबंधन के अलावा अपनी भावनाएँ दबाने के बजाय साझा करना भी अत्यंत लाभकारी है।

