कविता. रोहतक : प्रदूषण ने खतरनाक रूप धारण कर लिया है। मंगलवार सुबह रोहतक शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 586 दर्ज किया गया, जो सामान्य से कई गुना अधिक और बेहद गंभीर स्थिति को दर्शाता है। हवा में पीएम2.5 का स्तर करीब 368 और पीएम10 का स्तर 452 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि शहर की हवा में सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचने वाले बेहद बारीक और मोटे प्रदूषक कणों की मात्रा काफी बढ़ गई है। सुबह से ही प्रदूषण की मार लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ने लगी है।
दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप-2 लागू कर दिया है। इसके तहत होटल, ढाबों और रेस्तरां में तंदूर व भट्ठियों में कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। स्वच्छ ईंधन के इस्तेमाल के निर्देशों के साथ प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी है।
500 पार एक्यूआई, बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंची हवा
एक्यूआई का स्तर 586 तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि रोहतक की हवा में प्रदूषण की मात्रा बेहद अधिक है। सामान्य तौर पर एक्यूआई से 50 तक अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बहुत खराब और 401 से 500 गंभीर श्रेणी में माना जाता है। 500 से ऊपर का स्तर इन सामान्य श्रेणियों से भी आगे की अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। ऐसे हालात में स्वस्थ व्यक्ति को भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है, जबकि पहले से सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
पीएम2.5 और पीएम10 का बढ़ता स्तर फेफड़ों के लिए खतरा
रोहतक में पीएम2.5 का स्तर करीब 368 और PM10 का स्तर 452 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया है। पीएम2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ कण रक्त प्रवाह तक भी पहुंच सकते हैं। वहीं पीएम10 के कण सांस की नलियों और फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। भारतीय मानकों के अनुसार पीएम2.5 की 24 घंटे की सुरक्षित सीमा 60 और पीएम10 की 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। ऐसे में रोहतक में दोनों प्रदूषकों का स्तर निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है। लगातार ऐसी हवा में रहने से खांसी, गले में जलन, आंखों में पानी, सांस फूलना और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है
प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा, एलर्जी, हृदय व फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित लोगों पर पड़ता है। प्रदूषित हवा में लंबे समय तक सांस लेने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। अस्थमा के मरीजों को अटैक पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं हृदय रोगियों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए प्रदूषण उनके श्वसन तंत्र के विकास को प्रभावित कर सकता है। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।
निर्माण स्थलों पर नियमों की पालन करना होगा
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप का दूसरा चरण लागू किया है। इसके तहत होटल, ढाबों और रेस्तरां में तंदूर, भट्ठियों और अन्य जगहों पर कोयले व लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा खुले में कचरा जलाने पर रोक, सड़कों की नियमित सफाई, धूल नियंत्रण और निर्माण स्थलों पर नियमों की पालना सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
बरतें सावधानी, मॉर्निंग वॉक से भी बचें
प्रदूषण का स्तर इतना अधिक होने पर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सुबह और शाम के समय प्रदूषण का असर अधिक महसूस हो सकता है। ऐसे में खुले में मॉर्निंग वॉक, दौड़ने और व्यायाम करने से बचना चाहिए। जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलें और बाहर जाते समय अच्छी फिटिंग वाला एन95 मास्क इस्तेमाल करें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से घर के अंदर रखने का प्रयास करें। घर की खिड़कियां उस समय बंद रखें जब बाहर प्रदूषण अधिक हो। आंखों में जलन, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या सीने में दर्द होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। सांस लेने में गंभीर परेशानी या सीने में दर्द होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें।
ऐसे समझें एक्यूआई का पैमाना
- 0–50 अच्छा न्यूनतम प्रदूषण
- 51–100 संतोषजनक मामूली परेशानी
- 101–200 मध्यम संवेदनशील लोगों को परेशानी
- 201–300 खराब सांस संबंधी परेशानी
- 301–400 बहुत खराब लंबे समय तक रहने पर स्वास्थ्य प्रभाव
- 401–500 गंभीर स्वस्थ लोगों पर भी असर
- 500 से ऊपर निर्धारित पैमाने से ऊपर अत्यंत चिंताजनक स्थिति

