Monday, November 2, 2026
Homeदिल्लीAir Pollution : रोहतक में हवा हुई 'बीमार', सोमवार सुबह एक्यूआई 309...

Air Pollution : रोहतक में हवा हुई ‘बीमार’, सोमवार सुबह एक्यूआई 309 तक पहुंचा

कविता.रोहतक : दिवाली की रोशनी से पहले प्रदूषण की धुंध गहराने लगी है। रोहतक शहर में हवा की रफ्तार धीमी पड़ते ही प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा होने लगे हैं। सोमवार सुबह तक रोहतक का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 309 तक पहुंच गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है।

चिंता की बात यह है कि अभी दिवाली पर आतिशबाजी का असर सामने आना बाकी है, लेकिन शहर की हवा पहले ही सांस लेने लायक नहीं रह गई है। ऐसे में सुबह-शाम सैर करने वाले लोगों, खुले में व्यायाम करने वालों और बच्चों-बुजुर्गों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। सवाल यह है कि जब दिवाली से पहले ही हवा का यह हाल है तो त्योहार के बाद प्रदूषण किस स्तर तक पहुंचेगा।

हवा नहीं चली तो शहर के ऊपर ही ठहर गया प्रदूषण का गुबार

रोहतक में प्रदूषण बढ़ने के पीछे हवा की धीमी रफ्तार भी एक बड़ी वजह बन रही है। रविवार शाम हवा की गति करीब 4 से 5 किलोमीटर प्रति घंटा रही। सामान्य तौर पर हवा तेज चलने पर वातावरण में मौजूद प्रदूषक तत्व फैलकर कम हो जाते हैं, लेकिन हवा की गति कम होने पर धूल और दूसरे प्रदूषक कण वातावरण में ही जमा रहने लगते हैं। यही वजह है कि शहर में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ मौसम में बदलाव और हवा की कम गति प्रदूषण को लंबे समय तक वातावरण में बनाए रख सकती है। ऐसे में केवल प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत ही नहीं, बल्कि मौसम की स्थिति भी शहर की हवा को प्रभावित कर रही है।

सुबह की सैर और शाम की वॉक पर भी पड़ सकता है असर

रोहतक में बड़ी संख्या में लोग सुबह और शाम पार्कों, सड़कों तथा खुले स्थानों पर सैर और व्यायाम करते हैं। बुजुर्गों के साथ युवा भी फिटनेस के लिए खुले में दौड़ लगाते हैं। लेकिन एक्यूआई 300 के पार पहुंचने पर खुले में लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियां करना जोखिम बढ़ा सकता है। व्यायाम के दौरान सांस लेने की गति बढ़ जाती है और शरीर में अधिक मात्रा में प्रदूषित हवा पहुंच सकती है। ऐसे में लोगों को प्रदूषण के स्तर को देखकर ही बाहर निकलने का समय तय करना चाहिए। खासकर सुबह-शाम की सैर को लेकर सावधानी जरूरी है। जिन लोगों को सांस संबंधी परेशानी है, उन्हें खुले में व्यायाम करने से बचना चाहिए।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा चुनौतीपूर्ण

प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता। बच्चों का श्वसन तंत्र अभी विकसित हो रहा होता है, जबकि बुजुर्गों और पहले से सांस या हृदय संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को प्रदूषण का ज्यादा खतरा हो सकता है। एक्यूआई 309 जैसी स्थिति में आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की आउटडोर गतिविधियों और खेलकूद पर भी इसका असर पड़ सकता है। अभिभावकों को बच्चों को अनावश्यक रूप से धूल और धुएं वाले वातावरण में खेलने से रोकना चाहिए। यदि सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या लगातार खांसी हो तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

दिवाली के पटाखे बढ़ा सकते हैं मुश्किल

दिवाली से पहले ही रोहतक का एक्यूआई 309 तक पहुंचना प्रशासन और आमजन दोनों के लिए चिंता का संकेत है। त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण प्रदूषण को और बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा सड़कों पर वाहनों की आवाजाही, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां भी हवा की गुणवत्ता प्रभावित करती हैं। ऐसे में जरूरी है कि खुले में कचरा और पत्तियां न जलाई जाएं, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय किए जाएं और अनावश्यक वाहन इस्तेमाल से बचा जाए। लोग भी प्रदूषण का स्तर जांचकर ही बाहर निकलें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला और सही फिटिंग का एन95 मास्क इस्तेमाल करें। दिवाली की खुशियां मनाते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि त्योहार का उत्साह शहर की सांसों पर भारी न पड़े।

RELATED NEWS

Most Popular