कविता.रोहतक : डी पार्क मार्केट में एसी के कंप्रेशर में विस्फोट के बाद लगी भीषण आग, जिसमें 10 से अधिक दुकानें जलकर खाक हो गई थीं, ने शहर में फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद प्रशासन और फायर विभाग अलर्ट मोड पर है। अब उन व्यावसायिक संस्थानों, शोरूम, अस्पतालों, स्कूलों, होटल, बैंक्वेट हॉल और अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की तैयारी है, जहां फायर सेफ्टी के अनिवार्य प्रबंध नहीं किए गए हैं। नियमों का पालन नहीं मिलने पर नोटिस, जुर्माना और आवश्यकता पड़ने पर संस्थान को सील करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
फायर विभाग का कहना है कि अधिकांश हादसे लापरवाही, ओवरलोड बिजली, खराब वायरिंग और अग्निशमन उपकरणों की कमी के कारण होते हैं। यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाए तो बड़ी जनहानि और करोड़ों के नुकसान से बचा जा सकता है।
किन संस्थानों के लिए फायर सेफ्टी व्यवस्था जरूरी
फायर सेफ्टी नियम केवल बड़े मॉल तक सीमित नहीं हैं। अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, होटल, बैंक्वेट हॉल, शोरूम, बहुमंजिला इमारतें, कोचिंग सेंटर, औद्योगिक इकाइयां, गोदाम और भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्निशमन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम अनिवार्य माने जाते हैं। इन संस्थानों को समय-समय पर फायर विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी लेना होता है।
नियमों की अनदेखी कितनी खतरनाक
जहां फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं होते, वहां छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। खराब वायरिंग, ओवरलोड बिजली, बंद निकास मार्ग, एक्सपायर फायर सिलेंडर और बिना अलार्म सिस्टम वाले भवनों में आग तेजी से फैलती है। ऐसे मामलों में जान जाने का खतरा बढ़ जाता है, करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो सकती है और संस्थान संचालकों पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
प्रशासन की जांच में किन बिंदुओं पर रहेगी नजर
डी पार्क अग्निकांड के बाद होने वाली जांच में यह देखा जाएगा कि भवन के पास वैध फायर एनओसी है या नहीं, फायर एक्सटिंग्विशर कार्यशील हैं या नहीं, स्प्रिंकलर और अलार्म सिस्टम चालू हैं या नहीं, इमरजेंसी एग्जिट खुला और उपयोग योग्य है या नहीं, बिजली की वायरिंग सुरक्षित है या नहीं तथा कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया है या नहीं। कमियां मिलने पर संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी किया जा सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह, हादसे से पहले ही करें तैयारी
विशेषज्ञों का मानना है कि आग लगने के बाद राहत कार्य करने से बेहतर है कि पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए। प्रत्येक संस्थान को समय-समय पर फायर ऑडिट कराना चाहिए, अग्निशमन उपकरणों की सर्विसिंग करवानी चाहिए, कर्मचारियों की नियमित मॉक ड्रिल करानी चाहिए और बिजली के उपकरणों की जांच करानी चाहिए। थोड़ी सी सावधानी बड़े हादसे को टाल सकती है।
क्या-क्या होना चाहिए
- प्रत्येक मंजिल पर कार्यशील फायर एक्सटिंग्विशर लगाए जाएं।
- भवन में फायर अलार्म सिस्टम और स्मोक डिटेक्टर अनिवार्य रूप से हों।
- बहुमंजिला इमारतों में ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम लगाया जाए।
- पर्याप्त पानी के साथ फायर हाइड्रेंट सिस्टम उपलब्ध हो।
- स्पष्ट संकेतों के साथ इमरजेंसी एग्जिट और निकासी मार्ग हमेशा खुले रहें।
- बिजली की वायरिंग, डीजी सेट और इलेक्ट्रिकल पैनल की समय-समय पर जांच कराई जाए।
- बिजली के ओवरलोड से बचने के लिए मानक क्षमता के उपकरण और केबल का उपयोग किया जाए।
- कर्मचारियों को नियमित फायर ड्रिल और आपातकालीन निकासी का प्रशिक्षण दिया जाए।
- सभी अग्निशमन उपकरणों की समय-समय पर सर्विसिंग और वैधता की जांच हो।
फायर सेफ्टी अपनाने के फायदे
- आग लगने पर शुरुआती चरण में ही उसे नियंत्रित किया जा सकता है।
- लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
- जान-माल के नुकसान की संभावना काफी कम हो जाती है।
- दमकल विभाग को राहत और बचाव कार्य में आसानी होती है।
- कारोबार और संस्थान को होने वाला आर्थिक नुकसान कम होता है।
- बीमा क्लेम और कानूनी प्रक्रियाओं में सुविधा मिलती है।
- कर्मचारियों और ग्राहकों में सुरक्षा का भरोसा बढ़ता है।
- बड़े हादसों और जनहानि की आशंका काफी हद तक टल जाती है।

