Friday, September 18, 2026
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विश्व क्षय रोग दिवस पर विशेष : टीबी का संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता, जानें लक्षण

विश्व टीबी दिवस 2024 :  विश्व में क्षय रोग (टीबी) से हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है और यह मौत का 13वां मुख्य कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने टीबी को दुनिया के सबसे घातक संक्रामक रोगों में रखा है 2021 में टीबी से कुल 16 लाख लोगों की मृत्यु हुई और 2022 में भारत में दर्ज किए गए टीबी के कुल मामलों की संख्या 21.42 लाख थी। यह जानकारी पूर्व सिविल सर्जन एवं लोकनायक जयप्रकाश जिला नागरिक अस्पताल के परामर्शक-फिजिशियन डॉ.शैलेंद्र ममगाईं शैली ने दी। विश्व क्षय रोग दिवस प्रतिवर्ष 24 मार्च को मनाया जाता है।

उन्होंने टीबी(तपेदिक)के लक्षणों के बारे में बताया कि 19वीं और 20वीं सदी में टीबी को सफेद बुखार भी कहा जाता था,क्योंकि रोगी के शरीर के रक्त की मात्रा घटने से उसका चेहरा पीला पड़ जाता था। यह बीमारी आमतौर पर फेफड़ों में होती है, लेकिन यह किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। इसके लक्षणों में खासकर बलगम,रक्त का बहाव,गले अथवा छाती में दर्द, शाम को हल्का-हल्का बुखार, सांस की परेशानी,भूख में कमी और वजन में कमी आना शामिल है।

यह ऐसी बीमारी है जो हवा के माध्यम से फैलती है। हालांकि टीबी का संक्रमण किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। लेकिन कुछ कारकों में इसका खतरा बढ़ जाता है।यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति की अधिक संपर्क में रहते हैं जिससे टीबी रोग है तो इससे संपर्क में आने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा विकसित हो सकता है। इसके अलावा कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली से भी टीबी का संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की स्थितियों जैसे डायबिटीज(शुगर की बीमारी)फेफड़ों के रोग, गुर्दे की बीमारी, एचआईवी संक्रमितों अथवा कैंसर के शिकार लोगों में भी टीबी का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

डॉ.ममगाईं ने कहा कि हम टीबी को खत्म कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए बच्चों को बीसीजी वैक्सीन देना, टीबी संक्रमित व्यक्तियों को जल्दी ही उपचार के लिए चिकित्सक के पास ले जाना, टीबी पीड़ित रोगियों को सही और पौष्टिक आहार देना, धूम्रपान अथवा नशीली पदार्थों के सेवन से बचाना, लोगों में जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें टीबी के लक्षणों, बचाव के उपाय और उपचार की जानकारी देना, नियमित अंतराल पर स्क्रीनिंग कैंप लगाना स्वच्छता के उपायों को अपनाना, तपेदिक से पीड़ित से उचित दूरी बनाए रखना,मास्क का प्रयोग करना, कफ सेंस का होना और टीबी के रोगियों को सहायता प्रदान करना मुख्य रूप से शामिल है।

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