- 10–12 मई में हीट वेव का खतरा, घर से निकलना पड़ सकता है भारी, 3 दिन बेहद खतरनाक
Weather Update : रोहतक जिले में आने वाले सप्ताह में गर्मी अपने चरम पर पहुंचने जा रही है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 8 से 12 मई के बीच मौसम शुष्क और बेहद गर्म रहेगा। सप्ताह की शुरुआत में हल्के बादल छाए रहने की संभावना है, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेंगे, तापमान तेजी से बढ़ेगा। अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस से बढ़कर 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। 10 से 12 मई के बीच भीषण गर्मी (हीट वेव) चलने के आसार हैं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
रोहतक में ‘रेड जोन’ जैसी गर्मी का अलर्ट है, ये हफ्ता झुलसा देने वाला है। आसमान से आग बरसेगी। सावधानी नहीं बरती तो जान पर बन सकती है। विशेषकर बच्चों और बूढों को सावधान रहने की जरूरत है। इनका घर से निकलना भारी पड़ सकता है। सबसे अहम बात ये है कि इस सप्ताह शराब का अधिक सेवन जानलेवा भी हो सकता है।
क्यों बढ़ रही है इतनी गर्मी
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार तापमान बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। पश्चिमी विक्षोभ की अनुपस्थिति के चलते मौसम शुष्क बना हुआ है, जिससे ठंडी हवाओं का प्रभाव नहीं पड़ रहा। इसके साथ ही राजस्थान की ओर से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं हरियाणा के मैदानी इलाकों में तापमान को तेजी से बढ़ा रही हैं। आसमान साफ रहने से सूरज की किरणें सीधे जमीन तक पहुंच रही हैं, जिससे गर्मी और ज्यादा महसूस हो रही है।
हीट वेव का खतरा और सावधानी की जरूरत
भीषण गर्मी के इस दौर में लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने पर शरीर की सहनशीलता कम होने लगती है और हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करें, जैसे समय पर पानी पीना, धूप से बचाव करना और शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाना। खासकर मजदूर, किसान और खुले में काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं ताकि किसी तरह की आपात स्थिति से बचा जा सके।
अगले 7 दिन ऐसे पारा बढ़ने का अनुमान
- 7 मई- 39 डिग्री सेल्सियस
- 8 मई- 40 डिग्री सेल्सियस
- 9 मई- 43 डिग्री सेल्सियस
- 10 मई- 43 डिग्री सेल्सियस
- 11 मई- 44 डिग्री सेल्सियस
- 12 मई- 44 डिग्री सेल्सियस के पार
स्वास्थ्य पर पड़ेगा असर
- हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ता है, शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है
- डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से कमजोरी, थकान और बेहोशी तक की स्थिति बन सकती है
- लगातार सिरदर्द, चक्कर आना और उल्टी जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं
- तेज धूप से सनबर्न, स्किन रैश और एलर्जी की समस्या बढ़ती है
- लू लगने से शरीर में ऐंठन और तेज बुखार हो सकता है
- आंखों में जलन, सूखापन और लालपन की शिकायत बढ़ सकती है
- ब्लड प्रेशर और दिल के मरीजों के लिए जोखिम ज्यादा, हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है
- बच्चों और बुजुर्गों में इम्युनिटी कमजोर होने के कारण हालत जल्दी बिगड़ सकती है
- लंबे समय तक गर्मी में रहने से किडनी पर भी असर पड़ सकता है
ये सावधानी बरतें
- दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें
- बाहर निकलते समय सिर पर टोपी, गमछा या छाता जरूर इस्तेमाल करें
- हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर ठंडा रहे
- दिनभर में बार-बार पानी पिएं, प्यास लगे या न लगे तब भी हाइड्रेट रहें
- नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और ओआरएस का सेवन बढ़ाएं
- खाली पेट धूप में बाहर निकलने से बचें, हल्का और संतुलित भोजन करें
- ज्यादा तला-भुना और मसालेदार भोजन कम करें
- धूप से लौटते ही तुरंत ठंडा पानी या एसी में न जाएं, शरीर को सामान्य होने दें
- घर को ठंडा रखने के लिए पर्दे, कूलर या पंखे का सही उपयोग करें
- शराब, कैफीन और सॉफ्ट ड्रिंक का सेवन न करें, ये डिहाइड्रेशन बढ़ाते हैं
हीट वेव की चपेट में आने पर ये करें
- व्यक्ति को तुरंत छांव या ठंडी जगह पर ले जाएं
- तंग कपड़े ढीले करें और शरीर को ठंडा करने के लिए गीले कपड़े या पानी का इस्तेमाल करें
- धीरे-धीरे पानी, ओआरएस या नमक-चीनी का घोल पिलाएं
- तेज बुखार या हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो तुरंत ठंडे पानी की पट्टियां रखें
- बेहोशी, तेज उल्टी या हालत बिगड़ने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं
- डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवा न लें, खुद से इलाज करने से बचें
- मरीज को अकेला न छोड़ें, लगातार उसकी हालत पर नजर रखें
- अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या भ्रम की स्थिति हो तो इसे इमरजेंसी मानें
- समय रहते इलाज मिलने से गंभीर स्थिति और जान का खतरा टाला जा सकता है
गर्मी को हल्के में न लें
इस तरह की भीषण गर्मी को बिल्कुल हल्के में नहीं लेना चाहिए। जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचता है, तो शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा जोखिम बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीपी, शुगर या दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों को होता है। ऐसे लोग धूप में कम से कम निकलें और खुद को पूरी तरह हाइड्रेट रखें। अगर किसी व्यक्ति को तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, अत्यधिक पसीना या अचानक बेहोशी महसूस हो, तो यह हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सेवन न करें और लक्षण दिखते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।-डॉ. रमेश चंद्र, सीएमओ, रोहतक।

