- रोहतक में जगह-जगह लगाए गए थे कूड़ेदान, कई स्थानों पर अब सिर्फ स्टैंड बाकी
कविता. रोहतक : शहर को साफ-सुथरा रखने और सड़कों पर कूड़ा बिखरने से रोकने के लिए नगर निगम की ओर से जगह-जगह डस्टबीन लगाए गए थे। इन डस्टबीन का उद्देश्य लोगों को कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने की सुविधा देना था, लेकिन अब शहर के कई हिस्सों में व्यवस्था की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। कई जगह डस्टबीन गायब हैं और उनके स्थान पर केवल खाली स्टैंड खड़े दिखाई दे रहे हैं। कन्हेली रोड पर भी यही स्थिति नजर आ रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर डस्टबीन कहां गए और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी। क्या शहर के डस्टबीन नशेडियों के निशाने पर हैं।
कन्हेली रोड पर सड़क किनारे डस्टबीन लगाने के लिए बनाए गए स्टैंड तो मौजूद हैं, लेकिन उन पर डस्टबीन नजर नहीं आते। खाली स्टैंड इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां कभी सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए डस्टबीन लगाए गए थे। अब डस्टबीन नहीं होने के कारण लोगों के सामने कूड़ा डालने के लिए निर्धारित व्यवस्था भी कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। शहर के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के खाली स्टैंड होने की बात सामने आ रही है।
शहर में कई जगह एक जैसे हालात
मामला केवल कन्हेली रोड तक सीमित नहीं है। रोहतक शहर के कई स्थानों पर डस्टबीन के स्टैंड तो दिखाई देते हैं, लेकिन डस्टबीन गायब हैं। इससे यह सवाल भी खड़ा होता है कि डस्टबीन हटने के बाद उन्हें दोबारा लगाने या उनकी जगह पर व्यवस्था बहाल करने के लिए क्या कार्रवाई की गई। यदि सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए डस्टबीन लगातार गायब होते हैं तो सफाई व्यवस्था पर किए जा रहे खर्च और उसकी निगरानी दोनों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
डस्टबीन गायब होने से सफाई व्यवस्था पर असर
डस्टबीन लगाए जाने का मकसद ही यह था कि लोग सड़क या खाली जगह पर कूड़ा डालने के बजाय उसे कूड़ेदान में डालें। लेकिन जब स्टैंड तो खड़े हों और डस्टबीन ही न हों तो यह व्यवस्था अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकती। डस्टबीन की कमी से आसपास कूड़ा जमा होने की आशंका बढ़ जाती है और सफाई व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता है। ऐसे में गायब डस्टबीन को जल्द से जल्द दोबारा लगाने की जरूरत है।
रखवाली कौन करता है, डस्टबीन की निगरानी पर सवाल
डस्टबीन सार्वजनिक संपत्ति का हिस्सा हैं और उन्हें लगाने के बाद उनकी सुरक्षा और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। सवाल यह है कि डस्टबीन गायब होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक कब पहुंची और उसके बाद क्या कार्रवाई हुई। क्या नियमित निरीक्षण में इनकी स्थिति दर्ज की जाती है या फिर डस्टबीन गायब होने के बाद भी खाली स्टैंड लंबे समय तक यूं ही पड़े रहते हैं? निगरानी व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से जिम्मेदारी तय करने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
नशेड़ियों के ले जाने की आशंका, लेकिन जांच जरूरी
डस्टबीन गायब होने को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं इन्हें नशेड़ी या असामाजिक तत्व तो उठाकर नहीं ले गए। कई बार सार्वजनिक स्थानों पर रखी लोहे या अन्य धातु की वस्तुओं को उठाकर ले जाने की घटनाएं सामने आती हैं। हालांकि, रोहतक में गायब डस्टबीन के मामले में यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन्हें नशेड़ियों ने ही ले जाया है। इसके लिए नगर निगम या संबंधित विभाग को जांच कर वास्तविक कारण स्पष्ट करना चाहिए। यदि चोरी या असामाजिक तत्वों की भूमिका सामने आती है तो सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी होगा।
खाली स्टैंड बने व्यवस्था पर सवाल
शहर में डस्टबीन लगाने के बाद यदि उनकी सुरक्षा नहीं हो पा रही और कुछ समय बाद केवल खाली स्टैंड ही बच रहे हैं तो यह पूरी व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़ा करता है। नगर निगम को ऐसे सभी स्थानों की पहचान कर गायब डस्टबीन की संख्या और उनकी स्थिति की जानकारी जुटानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कितने डस्टबीन गायब हुए, उनके गायब होने की वजह क्या रही और जिम्मेदारी किसकी तय की गई। जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, शहर में खड़े खाली स्टैंड सफाई व्यवस्था की अधूरी कहानी ही बयां करते रहेंगे।


