- 22 वार्डों में विकास कार्य अटके होने और सुनवाई नहीं होने से नाराजगी
- पूर्व मंत्री व मेयर रामअवतार वाल्मीकि के सामने तालमेल बनाने की चुनौती
कविता.रोहतक: नगर निगम में विकास कार्यों की रफ्तार धीमी है, कहीं बड़े प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं तो कहीं टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू होने का इंतजार है। वार्डों की समस्याओं को लेकर पार्षदों की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।
ऐसे में 22 अक्टूबर को होने वाली नगर निगम हाउस की बैठक से पहले सोमवार (19 अक्टूबर) को होने वाली बैठक काफी अहम मानी जा रही है। पूर्व मंत्री और मेयर रामअवतार वाल्मीकि पार्षदों के साथ बैठकर उनकी नाराजगी दूर करने और आपसी तालमेल बनाने की कोशिश करेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या दोनों नाराज पार्षदों को मनाने में कामयाब हो पाएंगे। क्या पार्षदों को विकास कार्य शुरू होने और शिकायतों पर सुनवाई का भरोसा मिल पाएगा। आज की बैठक के नतीजों पर सबकी नजरें रहेंगी, क्योंकि इसका असर तीन दिन बाद होने वाली हाउस की बैठक में भी दिखाई दे सकता है।
नाराजगी दूर करना आसान नहीं, पार्षदों को चाहिए काम का भरोसा
नगर निगम के कई वार्डों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार पार्षदों की नाराजगी की बड़ी वजह बनी हुई है। पार्षदों का कहना है कि वार्ड की समस्याएं उठाने के बावजूद अधिकारियों के स्तर पर अपेक्षित सुनवाई नहीं हो रही। जनता उनसे विकास कार्यों का हिसाब मांगती है, लेकिन काम शुरू नहीं होने पर उनके पास भी जवाब देना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आज की बैठक में केवल शिकायतें सुनना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पार्षदों को यह भरोसा दिलाना भी चुनौती होगी कि उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से कराया जाएगा।
कहीं प्रोजेक्ट अधूरे, कहीं टेंडर के बाद भी इंतजार
शहर के कई वार्डों में बड़े विकास प्रोजेक्ट अधूरे पड़े हैं। वहीं, कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिनकी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद काम शुरू होने में देरी हो रही है। करीब एक साल से चल रही एक वर्ष के टेंडर की प्रक्रिया को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। पार्षद चाहते हैं कि वार्डों में विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर दिखाई दें। आज की बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा होने और अटके कार्यों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत रहेगी।
पूर्व मंत्री और मेयर के सामने तालमेल बनाने की चुनौती
पूर्व मंत्री और मेयर रामअवतार वाल्मीकि के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्षदों की शिकायतों को सुनकर उनके बीच भरोसा कायम करने की होगी। नाराज पार्षदों को साथ लेकर चलना और उनके वार्डों में विकास कार्यों को गति दिलाना आसान नहीं होगा। बैठक में यह भी अहम रहेगा कि पार्षदों की समस्याओं पर क्या रुख अपनाया जाता है और उन्हें समाधान को लेकर कितना स्पष्ट आश्वासन मिलता है। यदि बातचीत से सहमति बनती है तो हाउस की बैठक में बेहतर तालमेल देखने को मिल सकता है, लेकिन असंतोष बरकरार रहा तो सदन में भी ये मुद्दे उठ सकते हैं।
तीन दिन बाद हाउस, आज की बैठक से तय होगा माहौल
नगर निगम हाउस की पिछली बैठक पिछले साल नवंबर में हुई थी। अब 22 अक्टूबर को होने वाली बैठक में शहर के विकास कार्यों और वार्डों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी है। लंबे अंतराल के बाद होने वाली इस बैठक से पहले पार्षदों की नाराजगी दूर करना जरूरी माना जा रहा है। आज की बैठक में बनी सहमति, विकास कार्यों को लेकर मिलने वाले आश्वासन और शिकायतों पर होने वाली चर्चा से हाउस के माहौल का अंदाजा लग सकता है। अब देखना यह है कि पूर्व मंत्री और मेयर पार्षदों को साथ लेकर चलने में कितने सफल होते हैं और क्या विकास कार्यों को लेकर उनकी नाराजगी दूर हो पाती है।

