Monday, August 31, 2026
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Patwari Strike : पटवारियों की कलम थमी, हजारों लोग परेशान, जमा बंदी सहित कई काम अटके

  • 26 अगस्त से कलम छोड़ हड़ताल पर पटवारी, चार दिन में करीब 3 हजार लोगों के काम प्रभावित
  • हड़ताल लंबी चली तो बढ़ेगी लोगों की परेशानी

रोहतक : पटवारियों की हड़ताल अब आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बनने लगी है। पहले 20 और 21 अगस्त को दो दिन की हड़ताल के बाद पटवारियों ने 26 अगस्त से कलम छोड़ हड़ताल शुरू कर दी है। चार दिन से राजस्व विभाग से जुड़े कई जरूरी काम पूरी तरह प्रभावित हैं।

तहसील और पटवारखानों में काम करवाने पहुंच रहे लोगों को बिना काम करवाए वापस लौटना पड़ रहा है। अनुमान है कि इन चार दिनों में करीब 3 हजार लोगों के काम अटक चुके हैं।

जमा बंदी समेत कई जरूरी काम रुके

पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर राजस्व विभाग के कामकाज पर पड़ा है। जमा बंदी, जाति सत्यापन, ऋण संबंधी कार्य, नामांतरण, म्यूटेशन और अन्य राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े काम प्रभावित हो रहे हैं। लोगों को अपनी जमीन और अन्य दस्तावेजों से जुड़े कार्यों के लिए पटवारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन हड़ताल के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा।

जाति प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के लिए भी इंतजार

पटवारियों के स्तर पर होने वाले सत्यापन के काम रुकने से जाति प्रमाणपत्र समेत कई दस्तावेजों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। विद्यार्थियों, नौकरी के लिए आवेदन करने वालों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों को दस्तावेज पूरे कराने में दिक्कत आ रही है। कई लोगों के जरूरी काम समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं। यदि हड़ताल और आगे बढ़ती है तो लंबित कामों की संख्या भी बढ़ती जाएगी।

पटवारियों की ये हैं प्रमुख मांगें

पटवारियों के संगठन की ओर से नई राजस्व नीति को वापस लेने की मांग की गई है। इसके साथ नए राजस्व पोर्टल की तकनीकी खामियां दूर करने, त्रुटियों की जिम्मेदारी तय करने, डिजिटल फसल सर्वे की प्रक्रिया में बदलाव करने, लंबित भुगतान एवं वेतन बकाया जारी करने की मांग भी शामिल है। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन और क्षेत्रीय कार्यों के लिए आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाएं, ताकि कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त दबाव न पड़े।

रोज तहसील पहुंच रहे लोग, खाली हाथ लौटने को मजबूर

हड़ताल के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है, जिनके काम पटवारी की रिपोर्ट या सत्यापन के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। ग्रामीण क्षेत्रों से लोग तहसीलों और पटवारी कार्यालयों में पहुंच रहे हैं, लेकिन काम नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। कई लोगों के लिए एक बार तहसील पहुंचना भी आसान नहीं होता। ऐसे में बार-बार चक्कर लगाने से लोगों की परेशानी और बढ़ रही है।

हड़ताल लंबी चली तो सरकारी कामों की रफ्तार पर पड़ेगा असर

चार दिन की हड़ताल में ही करीब 3 हजार लोगों के काम प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। अगर पटवारियों की कलम छोड़ हड़ताल लंबी खिंचती है तो जमा बंदी, सत्यापन और जमीन से जुड़े मामलों के साथ-साथ कई सरकारी योजनाओं की प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। पहले से लंबित कामों का दबाव बढ़ने की आशंका है। ऐसे में आम लोगों की नजर अब सरकार और पटवारियों के बीच होने वाली बातचीत पर है। समाधान जल्द नहीं निकला तो आने वाले दिनों में लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है।

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