Saturday, June 20, 2026
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टोक्यो विश्वविद्यालय में गूंजा गीता का सार्वभौमिक संदेश

विश्व की प्राचीनतम ज्ञान परंपराओं और आधुनिक वैश्विक चिंतन का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (IGM) 2026 के अंतर्गत विश्वप्रसिद्ध टोक्यो विश्वविद्यालय में ‘अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार’ का भव्य आयोजन किया गया। आधुनिक युग में वैश्विक शांति, मानसिक संतुलन और मानवीय मूल्यों की स्थापना में श्रीमद्भगवद्गीता की भूमिका पर केंद्रित इस सेमिनार ने भारत और जापान के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक संबंधों को नई दिशा प्रदान की।

वैश्विक ज्ञान और अकादमिक अनुसंधान के शीर्ष केंद्र टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित इस ऐतिहासिक सेमिनार में भारत और जापान के प्रतिष्ठित दार्शनिकों, राजनायिकों, उद्योगपतियों, विद्वानों और विद्यार्थियों ने सहभागिता कर गीता के सार्वभौमिक संदेश पर गंभीर विमर्श किया।

गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने दिव्य उद्बोधन में कहा कि गीता किसी एक देश, संप्रदाय अथवा धर्मग्रंथ की सीमाओं में बंधी नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय के तनाव, अस्थिरता और वैश्विक संघर्षों के बीच गीता का निष्काम कर्मयोग तथा मानसिक संतुलन का सिद्धांत विश्व को शांति और समरसता की दिशा प्रदान कर सकता है।

स्वामी गुरु शरणानंद महाराज ने भी गीता के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता केवल दर्शन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री का विशेष वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने कुरुक्षेत्र की पावन धरा से निकले गीता संदेश के वैश्विक प्रसार की सराहना करते हुए भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में श्रीमद्भगवद्गीता की कालजयी एवं सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता ऐसा दिव्य ज्ञानग्रंथ है, जो समय, संस्कृति, भाषा और धर्म की सीमाओं से परे समस्त मानवता को मार्गदर्शन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य, आत्मानुशासन और वैश्विक कल्याण का शाश्वत संदेश है।

भारत के दूतावास के प्रतिनिधियों तथा जापान में भारत के पूर्व राजदूत सतोशी सुजुकी ने भारत-जापान के प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के इस नए अध्याय की सराहना की। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की वैश्विक अवधारणा, उसके प्रशासनिक दृष्टिकोण तथा सांस्कृतिक उद्देश्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया।

सेमिनार को टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर कातो सान के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। महाभारत के जापानी अनुवाद कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले प्रोफेसर कावामुरा तथा गीता के गहन अध्ययन एवं जापानी अनुवाद के लिए समर्पित प्रोफेसर सातो सान ने अपने शोध अनुभव साझा किए और गीता के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।

भारत में मारुति सुजुकी के संचालन से जुड़े वरिष्ठ उद्योगपति कोइची सुजुकी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन के सामाजिक एवं आर्थिक महत्व को भी नई ऊंचाई प्रदान की।

कार्यक्रम के दौरान टोक्यो विश्वविद्यालय में स्थापना हेतु स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी गुरुशरणानंद महाराज, डॉ अमित अग्रवाल और उपेन्द्र सिंघल द्वारा प्रोफेसर ताका हीरो काटो को गीता भेंट की गई।

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने बताया कि एक ऐतिहासिक पहल के रूप में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा पहली बार अष्टाध्यायी गीता का जापानी भाषा में अनुवाद प्रकाशित कर सेमिनार के दौरान विद्वानों एवं अतिथियों को भेंट किया गया। यह प्रयास भारत और जापान के सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देने वाला माना गया।

कार्यक्रम स्थल पर कुरुक्षेत्र, गीता के संदेशों तथा भारत-जापान की सांस्कृतिक समानताओं को प्रदर्शित करती एक विशाल प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी का अवलोकन करने वाले जापानी विद्यार्थियों को विशेष स्मृति उपहार प्रदान किए गए।

भारत और जापान की कलात्मक परंपराओं के समन्वय से तैयार किए गए विशेष ‘फ्यूजन सांस्कृतिक कार्यक्रमों’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को सजीव रूप से प्रस्तुत किया।

महोत्सव के डिजिटल अभियान के अंतर्गत जापान में 14 दिवसीय ऑनलाइन गीता क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता को सोशल मीडिया पर व्यापक लोकप्रियता प्राप्त हुई, जिसमें जापान, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत सहित अनेक देशों के हजारों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार के दौरान विजेताओं को मंच पर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।

उन्होंने विशेष रूप से अजय नरूला, रोहन अग्रवाल, हिन्दू स्वयंसेवक संघ, जियो गीता, गीता परिवार, इस्कॉन तथा अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का दिन-रात किए गए अथक सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस संपूर्ण आयोजन के सफल संचालन में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड एवं गीता जयंती मेला प्राधिकरण के वरिष्ठ सदस्यों विजय नरूला, अलकेश मौदगिल, अशोक रोशा,  गुरनाम सैनी, डॉ. ऋषिपाल मथाना तथा डॉ. एम.के. मौदगिल की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी  तुषार सैनी, पुंडरी के विधायक सतपाल जांबा, पूर्व कुलपति डॉ. मार्कण्डेय, मेयर  रेणु बाला गुप्ता तथा श्यामलाल बंसल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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