Tuesday, August 25, 2026
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रोहतक में गंदगी का साम्राज्य! कूड़ा, सीवर और खुले गड्ढों से सजा शहर

कविता.रोहतक : शहर इन दिनों विकास की नहीं, बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। एक तरफ सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने व्यवस्था की कमर तोड़ दी है, दूसरी तरफ नालों और सीवरेज की सफाई न होने से गंदगी सड़कों तक पहुंच गई है। शहर की सड़कों पर कूड़े के ढेर, नालियों से बहता गंदा पानी और जगह-जगह खुदे पड़े गड्ढे देखकर ऐसा लगता है मानो नगर व्यवस्था ने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया हो। शहर में हालात इतने खराब हैं कि कई इलाकों से गुजरते समय लोगों को नाक पर कपड़ा रखना पड़ रहा है। सार्वजनिक शौचालयों की हालत भी सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही है। सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं और शहर धीरे-धीरे कूड़े और दुर्गंध के बोझ तले दबता जा रहा है।

सफाई के इंतजार में सड़ रहा शहर

सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर शहर की गलियों और मुख्य सड़कों पर दिखाई दे रहा है। जगह-जगह कूड़ा जमा है और समय पर उठान नहीं होने के कारण ढेर बढ़ते जा रहे हैं। कूड़े के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और फैलती दुर्गंध लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। जिस शहर में रोजाना हजारों लोग कामकाज के लिए निकलते हैं, वहां सफाई व्यवस्था का यह हाल सवाल खड़े करता है। फिलहाल हालात देखकर लगता है कि कूड़ा उठाने वाली गाड़ी से ज्यादा लोगों को अब उम्मीद उठाने वाले किसी चमत्कार से है।

गोकर्ण और मॉडल टाउन में सीवर का ‘स्वागत’

गोकर्ण और मॉडल टाउन के आसपास सीवरेज ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। राहगीरों और स्थानीय लोगों को इसी गंदगी के बीच से निकलना पड़ रहा है। सड़क पर जमा सीवर का पानी न केवल दुर्गंध फैला रहा है, बल्कि लोगों के लिए संक्रमण और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ा रहा है। नालों की सफाई नहीं होने से पानी की निकासी व्यवस्था भी प्रभावित है। बारिश या सीवर ओवरफ्लो होने की स्थिति में समस्या और गंभीर हो जाती है। शहर की जलनिकासी व्यवस्था देखकर यही सवाल उठता है कि आखिर सफाई का काम कागजों में ज्यादा साफ है या जमीन पर।

अंबेडकर चौक पर खुला गड्ढा

अंबेडकर चौक के पास गड्ढा खोदकर उसे खुला छोड़ दिया गया है। विभाग ने काम शुरू तो किया, लेकिन उसे पूरा करने और मौके को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी शायद गड्ढे के साथ ही दब गई। मुख्य चौराहे पर खुला गड्ढा हादसे का कारण बन सकता है। रात के समय खतरा और बढ़ जाता है। लोगों का सवाल सीधा है कि अगर काम जरूरी था तो गड्ढा खोदना भी जरूरी था, लेकिन उसे भरना या सुरक्षित करना आखिर इतना गैरजरूरी कैसे हो गया?

गांधी कैंप में ‘समाधान’ के नाम पर खुदा गड्ढा

गांधी कैंप के चाऊमीन चौक पर पानी की समस्या के समाधान के लिए खोदा गया गड्ढा भी लोगों की परेशानी कम करने के बजाय बढ़ा रहा है। समस्या के समाधान के लिए खोदी गई जगह अब खुद एक समस्या बन चुकी है और लंबे समय से भरी नहीं गई है। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि पानी की समस्या दूर होगी और सड़क पहले जैसी हो जाएगी। फिलहाल नतीजा यह है कि समस्या अपनी जगह है और उसके साथ एक गड्ढा बोनस में मिल गया है।

सार्वजनिक शौचालय भी बेहाल

शहर के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भी सफाई व्यवस्था की बदहाली का आईना बनी हुई है। जहां लोगों को बुनियादी सुविधा मिलनी चाहिए, वहां गंदगी और दुर्गंध ने जगह बना ली है। सफाई व्यवस्था ठप होने का असर सार्वजनिक सुविधाओं पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसे में शहर स्वच्छता के दावों और जमीन पर मौजूद हालात के बीच का अंतर खुद लोगों को महसूस हो रहा है।

सड़कें हैं, लेकिन साफ रास्ता नहीं

रोहतक में इन दिनों समस्या केवल एक इलाके या एक सड़क की नहीं है। कूड़ा, सीवर का पानी, गंदे नाले और अधूरे निर्माण कार्य मिलकर शहर की अलग-अलग तस्वीरें नहीं, बल्कि एक ही कहानी सुना रहे हैं कि व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। शहर के लोगों को अब यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि सड़क पर चलते समय वाहन संभालें, गड्ढे से बचें, सीवर के पानी से पैर बचाएं या फिर बदबू से बचने के लिए मुंह ढकें। स्वच्छ शहर का सपना फिलहाल कूड़े के ढेर के पीछे कहीं दिखाई नहीं दे रहा। सवाल सिर्फ इतना है कि सफाई कर्मियों की हड़ताल खत्म होने तक शहर कितना और सड़ेगा और जिम्मेदार विभाग तब तक कितनी बार ‘व्यवस्था सुधारने’ का भरोसा देगा।

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