Thursday, October 22, 2026
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रोहतक के बाजार में सेहत का सौदा! मिलावट के खेल पर कौन लगाएगा लगाम? पूरे शहर में छापेमारी की दरकार

कविता.रोहतक : त्योहारों का मौसम हो या रोजमर्रा की रसोई, बाजार से खरीदा जाने वाला दूध, पनीर, घी, मिठाई और खोवा कितना शुद्ध है, इसकी गारंटी आम आदमी के पास नहीं है। पिछले दिनों रोहतक में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई करते हुए 80 किलो खराब खोवा पकड़ा और उसे मौके पर ही नष्ट करवाया। इसके बाद सांपला में 240 किलो संदिग्ध पनीर पकड़ा गया। यह कार्रवाई मिलावट के खतरे की एक झलक भर है।

सवाल यह है कि जब एक जगह इतनी बड़ी मात्रा में खराब खोवा मिल सकता है, तो शहर के बाकी बाजारों में बिक रहे खाद्य पदार्थों की जांच कितनी जरूरी है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग को अब केवल शिकायत मिलने का इंतजार करने के बजाय नियमित जांच और छापेमारी तेज करने की जरूरत है। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी खरीदारी के दौरान सतर्क रहना होगा, ताकि चंद रुपयों के लालच में उनकी सेहत से समझौता न हो।

बाजारों की जांच जरूरी

खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से 80 किलो खराब खोवा पकड़कर नष्ट करवाने की कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस एक मामले के आधार पर पूरे शहर में मिलावट की स्थिति का आकलन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह जरूर स्पष्ट होता है कि बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री की नियमित जांच बेहद जरूरी है। मिठाई की दुकानों, डेयरियों, पनीर विक्रेताओं और खाद्य सामग्री तैयार करने वाली इकाइयों की जांच की जाए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान हो सके। विभाग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि कार्रवाई केवल किसी एक दुकान तक सीमित न रहे, बल्कि शहर के अलग-अलग इलाकों में लगातार निगरानी की जाए।

त्योहार ही नहीं, रोजाना की थाली पर भी खतरा

मिलावट का खतरा केवल त्योहारों के दौरान बिकने वाली मिठाइयों तक सीमित नहीं है। दूध, पनीर, घी, मसाले, तेल और अन्य रोजमर्रा के खाद्य पदार्थ भी उपभोक्ताओं की चिंता का विषय हैं। इन चीजों का इस्तेमाल घरों में रोज होता है, इसलिए इनकी गुणवत्ता में गड़बड़ी सीधे लोगों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा विभाग को उन दुकानों और प्रतिष्ठानों पर विशेष नजर रखनी चाहिए, जहां खाद्य पदार्थों की बिक्री और भंडारण बड़े स्तर पर होता है। नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला में जांच और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई से ही बाजार में खाद्य सुरक्षा के प्रति जवाबदेही बढ़ाई जा सकती है।

चमक-दमक देखकर न खरीदें मिठाई, ग्राहक भी रहें सतर्क

दुकान पर सजी आकर्षक मिठाइयां और कम कीमत का लालच कई बार ग्राहकों को बिना जांच-पड़ताल खरीदारी करने के लिए प्रेरित करता है। लेकिन खाद्य पदार्थ खरीदते समय केवल रंग, चमक और कीमत को गुणवत्ता का पैमाना नहीं मानना चाहिए। पैक्ड सामान खरीदते समय उसकी पैकिंग, निर्माण और एक्सपायरी तिथि, बैच नंबर और खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी जरूर देखें। खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनकी साफ-सफाई, भंडारण और बिक्री की स्थिति पर ध्यान दें। किसी खाद्य पदार्थ के रंग, गंध, स्वाद या गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे खाने से बचें। हालांकि, केवल देखकर या चखकर हर प्रकार की मिलावट का पता लगाना संभव नहीं है, इसलिए जरूरत पड़ने पर विभागीय जांच ही निर्णायक साबित होती है।

शिकायत से आगे बढ़कर सक्रिय हो विभाग, तभी लगेगी लगाम

खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने की जिम्मेदारी केवल उपभोक्ताओं की नहीं, बल्कि संबंधित विभाग की भी है। विभाग को नियमित निरीक्षण, जोखिम वाले खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए प्रभावी व्यवस्था बनानी चाहिए। जहां नियमों का उल्लंघन मिले, वहां खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाए और जांच के निष्कर्षों के आधार पर लोगों को भी जागरूक किया जाए। उपभोक्ता संदिग्ध खाद्य सामग्री की जानकारी खाद्य सुरक्षा विभाग तक पहुंचाएं और खरीदारी की रसीद या पैकेट जैसी उपलब्ध जानकारी सुरक्षित रखें। रोहतक में 80 किलो खराब खोवा पकड़े जाने की कार्रवाई को व्यापक अभियान की शुरुआत बनाया जाना चाहिए, ताकि बाजार में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित हो और लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों पर लगाम लग सके।

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