Friday, October 23, 2026
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बिन बिजली सब ‘सून’ : हड़ताल से लड़खड़ाने लगी जिंदगी की रफ्तार, पानी से लेकर कारोबार तक प्रभावित

  • बिजली कर्मचारियों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी
  • दुकानों पर आइसक्रीम पिघली, मोबाइल बंद, मशीनों की रफ्तार थमी*
  • जेनरेटर भी किराए पर नहीं मिल रहे

कविता.रोहतक : बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने ऐसा करंट मारा है कि घरों से बाजारों और फैक्ट्रियों तक जिंदगी की रफ्तार लड़खड़ाने लगी है। बिजली की लड़ाई कर्मचारियों और सरकार के बीच है, लेकिन इसकी कीमत आम जनता चुका रही है। शुक्रवार को हड़ताल के दूसरे दिन रोहतक में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बिजली नहीं तो घरों में पानी की मोटरें बंद, मोबाइल की बैटरी खत्म तो संपर्क टूटने का डर और दुकानों में फ्रीजर बंद तो सामान खराब होने की नौबत।

जनरेटर किराये पर लेने निकलो तो वह भी आसानी से नहीं मिल रहा। उद्योगों में मशीनें रुकने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है और कारोबारियों को नुकसान की चिंता सता रही है। यह परेशानी केवल रोहतक की नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने वाले इलाकों में लोगों को ऐसी ही चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। तीन दिन की हड़ताल के बीच अब सबकी निगाहें रविवार पर टिकी हैं। उम्मीद है कि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति बन जाएगी, लेकिन मांगें नहीं मानी गईं तो जनता की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

घरों में रोजमर्रा के काम ठप

बिजली संकट का सबसे सीधा असर घरों की रसोई और पानी की व्यवस्था पर पड़ रहा है। मोटर नहीं चलने से टंकियां नहीं भर पा रहीं और जिन घरों में पहले से पानी जमा नहीं है, वहां लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। नहाने, कपड़े धोने, खाना बनाने और साफ-सफाई जैसे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं। बहुमंजिला मकानों में रहने वाले परिवारों की दिक्कत और बढ़ जाती है, क्योंकि पानी ऊपर तक पहुंचाने के लिए मोटर की जरूरत होती है। इनवर्टर कुछ समय तक रोशनी और पंखे चलाने में मदद कर सकते हैं, लेकिन पानी की मोटर और ज्यादा बिजली खपत वाले उपकरणों का विकल्प नहीं बन पाते। ऐसे में बिजली की हड़ताल ने घरों की व्यवस्था को सीधे प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

मोबाइल की बैटरी खत्म, डिजिटल कामकाज पर भी ब्रेक

आज के दौर में बिजली का संकट सिर्फ अंधेरे तक सीमित नहीं है। मोबाइल फोन चार्ज नहीं होंगे तो लोगों का संपर्क टूटने लगता है। इनवर्टर और पावर बैंक भी सीमित समय तक ही सहारा दे सकते हैं। ऑनलाइन भुगतान, यूपीआई, कंप्यूटर से होने वाला काम और इंटरनेट पर निर्भर सेवाओं में परेशानी बढ़ सकती है। दुकानदारों के सामने बिलिंग मशीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चलाने की चुनौती है, जबकि घर से काम करने वाले कर्मचारियों और ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों का काम भी प्रभावित हो सकता है। बिजली लंबे समय तक बाधित रहने पर वाई-फाई राउटर, प्रिंटर और अन्य उपकरण भी बंद हो जाते हैं। यानी बिजली की हड़ताल का असर घर की चारदीवारी से निकलकर लोगों के संपर्क, पढ़ाई और कमाई तक पहुंच रहा है।

फ्रीजर बंद तो आइसक्रीम खराब, दुकानदारों की जेब पर चोट

बिजली संकट ने दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। रोहतक में कन्फेक्शनरी और आइसक्रीम कारोबारियों के सामने फ्रीजर में रखे सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती है। बिजली नहीं आने से आइसक्रीम पिघलने लगी तो उसे दोबारा जमाकर बेच पाना भी गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं होगा। दूध, दही, पनीर और दूसरे जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के लिए भी लगातार बिजली जरूरी है। दूसरी तरफ, जनरेटर से दुकान चलाने का खर्च कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डालता है। हड़ताल के कारण जनरेटर की मांग बढ़ने से किराये पर मिलना भी मुश्किल हो रहा है। छोटे दुकानदारों के लिए महंगे विकल्प अपनाना आसान नहीं है। बिजली आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो रोज कमाकर खाने वाले कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

फैक्ट्रियों में मशीनें थमीं, उत्पादन और डिलीवरी पर संकट

औद्योगिक इकाइयों के लिए बिजली उत्पादन की बुनियादी जरूरत है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से मशीनें बंद होती हैं तो उत्पादन का पूरा शेड्यूल बिगड़ सकता है। कच्चे माल की प्रोसेसिंग, मशीनों से तैयार होने वाले उत्पादों और पैकिंग से लेकर माल की डिलीवरी तक की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। रोहतक समेत हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली पर निर्भर इकाइयों के लिए जनरेटर से काम चलाना महंगा विकल्प है। भारी मशीनों को चलाने के लिए अधिक क्षमता वाले जनरेटर और ईंधन की जरूरत पड़ती है। उत्पादन रुकने से ऑर्डर समय पर पूरे करने का दबाव बढ़ता है और श्रमिकों के काम के घंटे तथा उनकी कमाई पर भी असर पड़ सकता है। हड़ताल लंबी चली तो नुकसान केवल एक दिन के उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सप्लाई चेन और कारोबार की समयसीमा भी प्रभावित हो सकती है।

अस्पतालों से बाजारों तक चिंता, रविवार पर टिकी निगाहें

बिजली संकट का असर अस्पतालों, निजी क्लीनिकों, जांच लैब, बैंकों और अन्य जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। अस्पतालों में बैकअप व्यवस्था होने के बावजूद लंबे समय तक बिजली बाधित रहने पर जनरेटर और ईंधन की जरूरत बढ़ जाती है। जांच लैब में उपकरणों और कंप्यूटर सिस्टम को लगातार बिजली चाहिए, जबकि बाजारों में लिफ्ट, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक बिलिंग और दूसरी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। घरों में बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बिजली से चलने वाले जरूरी उपकरणों पर निर्भर लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है। ऐसे में हड़ताल का असर सिर्फ बिजली निगम तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि जनजीवन के कई हिस्सों तक पहुंच जाता है। अब सबकी नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत पर है। रविवार को हड़ताल समाप्त होने की उम्मीद है, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनी तो संकट लंबा खिंचने की आशंका है।

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