कविता.रोहतक : रावण का पुतला तो जलकर राख हो गया, लेकिन दशहरे की आतिशबाजी का धुआं रोहतक की हवा में ऐसा घुला कि लोगों की सांसों पर ही संकट मंडराने लगा। मंगलवार तक जिस शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 179 के आसपास था, वहां बुधवार सुबह प्रदूषण का स्तर 300 के पार पहुंच गया। त्योहार की चमक के बाद अब हवा में घुला धुआं लोगों की सेहत के लिए चिंता बढ़ा रहा है।
बदलते मौसम, गिरते तापमान और धीमी हवाओं के बीच प्रदूषण के कण वातावरण में टिके हुए हैं। ऐसे में सुबह-शाम की सैर से लेकर खुले में काम करने तक, हर गतिविधि पर प्रदूषित हवा का असर पड़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में पराली के धुएं और मौसम की परिस्थितियों ने भी चिंता बढ़ा दी है।
एक रात में बिगड़ा हवा का मिजाज, 179 से सीधे 302 पर पहुंचा एक्यूआई
रोहतक में प्रदूषण का स्तर जिस तेजी से बढ़ा है, उसने त्योहार के बाद हवा की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार, 20 अक्टूबर को एक्यूआई औसतन 179 दर्ज किया गया था। बुधवार, 21 अक्टूबर की सुबह यह बढ़कर करीब 301 से 302 तक पहुंच गया। यानी हवा की गुणवत्ता में महज कुछ घंटों के भीतर बड़ा बदलाव देखने को मिला। हालांकि, एक्यूआई के अलग-अलग मॉनिटरिंग स्टेशनों पर आंकड़ों में अंतर हो सकता है। बुधवार के इस स्तर को देखते हुए अब प्रदूषण से बचाव को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
रावण जला, लेकिन धुआं छोड़ गया आफत, पटाखों ने बढ़ाई परेशानी
दशहरे पर रावण दहन और आतिशबाजी के बाद हवा में धूल और धुएं के महीन कणों की मात्रा बढ़ने की आशंका है। खासकर पीएम2.5 और पीएम10 जैसे प्रदूषक सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। पीएम2.5 के बेहद छोटे कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। दमा, सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों, बुजुर्गों और बच्चों को अधिक परेशानी हो सकती है। हालांकि, प्रदूषण में हुई कुल वृद्धि में आतिशबाजी का सटीक योगदान जानने के लिए स्थानीय प्रदूषक आंकड़ों और स्रोतों का विश्लेषण जरूरी है।
सर्दी की दस्तक के साथ हवा की रफ्तार सुस्त
मौसम में बदलाव भी रोहतक की हवा को राहत नहीं मिलने दे रहा है। रात के तापमान में गिरावट और हवा की धीमी रफ्तार के कारण प्रदूषक आसानी से बिखर नहीं पाते। ऐसे हालात में धुआं और धूल वातावरण में जमा रह सकते हैं और सुबह-शाम धुंध जैसी स्थिति बन सकती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़क की धूल और अन्य स्थानीय स्रोत भी प्रदूषण को बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं। यदि हवा की गति कम बनी रहती है, तो प्रदूषण के स्तर में जल्द सुधार होना मुश्किल हो सकता है।
पराली के धुएं का भी डर, अगले दिनों में राहत मिलेगी या बढ़ेगी आफत
दशहरे के बाद अब निगाहें आने वाले दिनों के मौसम और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं पर हैं। पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पराली जलने से उठने वाला धुआं अनुकूल मौसमी परिस्थितियों में दूसरे इलाकों तक पहुंच सकता है। हवा की दिशा, गति और वातावरण में नमी जैसे कारक तय करेंगे कि इसका रोहतक पर कितना असर पड़ेगा। अनुमान के अनुसार, 23 अक्टूबर तक हवा की गुणवत्ता खराब से बहुत खराब श्रेणी में बनी रह सकती है। हालांकि, एक्यूआई रोजाना मौसम और प्रदूषण के स्रोतों के अनुसार बदल सकता है, इसलिए ताजा आधिकारिक पूर्वानुमान पर नजर रखना जरूरी होगा।
सुबह की सैर और खुले में कसरत पर रखें नजर, बच्चों-बुजुर्गों को बचाएं
एक्यूआई बढ़ने के साथ लोगों को अपनी दिनचर्या में सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहने पर सुबह-शाम खुले में दौड़ने, तेज कसरत करने और लंबे समय तक व्यस्त सड़कों के आसपास रहने से बचना बेहतर है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दमा या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। घर के भीतर भी धुआं और धूल आने से रोकने की कोशिश करें। आंखों में जलन, लगातार खांसी, सांस फूलने या सीने में जकड़न जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें। प्रदूषण कम करने के लिए अनावश्यक वाहन इस्तेमाल से बचना और कचरा या अन्य सामग्री खुले में न जलाना भी जरूरी है।

