कविता.रोहतक : मौसम बदलने के साथ मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बना हुआ है, लेकिन इस बार डेंगू के आंकड़े पिछले साल के मुकाबले राहत देने वाले हैं।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में डेंगू के अब तक 40 मरीज मिल चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 205 मामले दर्ज किए गए थे। यानी इस साल अब तक डेंगू के मामलों में करीब 80 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि, सितंबर और अक्टूबर में डेंगू के मामले तेजी से सामने आए हैं। ऐसे में राहत के इन आंकड़ों के बीच बदलते मौसम में सावधानी बरतना जरूरी है।
अक्टूबर में डेंगू का डंक तेज, 15 दिन में मिले 14 मरीज
डेंगू के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल के शुरुआती सात महीनों में जिले में स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में रही। जनवरी और फरवरी में कोई मरीज नहीं मिला, जबकि मार्च में एक केस सामने आया। अप्रैल से जुलाई तक भी कोई नया मामला दर्ज नहीं हुआ। अगस्त में चार मरीज मिले, लेकिन सितंबर में अचानक 21 नए केस सामने आने से चिंता बढ़ गई। अक्टूबर के शुरुआती 15 दिनों में ही 14 मरीज मिल चुके हैं। इस तरह अगस्त से 15 अक्टूबर तक डेंगू के 40 मामले सामने आए हैं। इससे साफ है कि इस सीजन में डेंगू का सबसे ज्यादा असर बारिश के बाद और सितंबर-अक्टूबर के दौरान देखने को मिला है। अब महीने के बाकी दिनों में विभाग की निगरानी और लोगों की सतर्कता अहम होगी।
23 महिलाएं, शहरी इलाकों में ज्यादा असर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में अब तक मिले 40 डेंगू मरीजों में 23 महिलाएं और 17 पुरुष हैं। स्थान के हिसाब से देखें तो 23 मरीज शहरी क्षेत्र से हैं, जबकि 17 मरीज ग्रामीण इलाकों में मिले हैं। यानी डेंगू का असर केवल शहर की कॉलोनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में भी संक्रमण के मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में उत्तम विहार, सुखपुरा चौक, खेड़ी साध, सेक्टर-3, मकडौली कलां, सैनिक कॉलोनी, कमला कॉलोनी, शीतल नगर, शोरा कोठी, मदिना गिंदरान, सुनारिया कलां, नेहरू कॉलोनी, रामगोपाल कॉलोनी और प्रेम नगर सहित कई इलाकों में मरीज दर्ज किए गए हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में मरीज मिलने से यह जरूरी हो जाता है कि घरों के साथ-साथ आसपास जमा पानी और खाली प्लॉटों की भी नियमित जांच की जाए।
दो भर्ती, 38 का ओपीडी में इलाज
डेंगू के कुल 40 मरीजों में से 38 को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी और उनका इलाज ओपीडी में किया गया। दो मरीजों को अस्पताल में भर्ती किए। राहत की बात यह भी है कि अभी तक जिले में डेंगू से किसी मौत की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, मरीजों का अस्पताल में भर्ती नहीं होना इस बात की गारंटी नहीं है कि डेंगू को हल्के में लिया जाए। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द या असामान्य कमजोरी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
पिछले साल 4072 नोटिस, इस बार 1984 पर कार्रवाई
पिछले साल के मुकाबले इस बार डेंगू के मामलों में कमी के साथ मलेरिया और चिकनगुनिया के आंकड़े भी राहत दे रहे हैं। जिले में मलेरिया और चिकनगुनिया का एक भी मरीज दर्ज नहीं हुआ, जबकि 2025 में मलेरिया के पांच और चिकनगुनिया के तीन मामले सामने आए थे। मच्छरों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने इस साल अब तक 1984 नोटिस जारी किए हैं, जबकि पिछले साल यह संख्या 4072 थी। हालांकि, रिपोर्ट में चालान की संख्या शून्य दर्ज है।

