कविता.रोहतक : राजस्व विभाग में लोगों को सुविधा देने के लिए शुरू की गई ऑटोमेटिक इंतकाल प्रणाली इन दिनों सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन गई है। सॉफ्टवेयर में तकनीकी दिक्कत के चलते कई मामलों में मंजूर हो चुके इंतकाल भी अचानक डिलीट हो रहे हैं। इसके बाद पटवारियों को उसी इंतकाल को दोबारा नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। इसका सीधा असर इंतकाल की पेंडेंसी पर पड़ रहा है।
हालात यह हैं कि पटवारियों की हड़ताल खत्म होने के बाद काम तेजी से निपटने की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी खामियों के चलते पेंडेंसी कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है। जमीन-जायदाद से जुड़े काम के लिए लोग तहसीलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
सुविधा के लिए शुरू हुआ सिस्टम, अब बन रहा परेशानी
राजस्व विभाग की ओर से इंतकाल प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के उद्देश्य से ऑटोमेटिक इंतकाल प्रणाली शुरू की गई थी। उम्मीद थी कि ऑनलाइन प्रक्रिया से लोगों को पटवारियों और तहसीलों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन सॉफ्टवेयर में आ रही तकनीकी दिक्कतों ने पूरी व्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सबसे बड़ी परेशानी यह सामने आ रही है कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंजूर इंतकाल भी सिस्टम से गायब हो रहे हैं।
मंजूर इंतकाल डिलीट, पटवारियों को फिर से करना पड़ रहा काम
तकनीकी खामी के कारण जब किसी इंतकाल का काम पूरा होने के बाद वह सिस्टम से डिलीट हो जाता है तो पटवारी के सामने उसे दोबारा तैयार करने की मजबूरी खड़ी हो जाती है। यानी एक ही इंतकाल पर दोबारा काम करना पड़ रहा है। इससे पहले से लंबित मामलों को निपटाने के बजाय कर्मचारियों का समय पुराने काम को दोबारा पूरा करने में लग रहा है। इसका असर सीधे इंतकाल की पेंडेंसी पर पड़ रहा है।
हड़ताल खत्म, लेकिन पेंडेंसी घटने के बजाय बढ़ी
पटवारियों की 20 से 31 अगस्त तक चली हड़ताल के बाद उम्मीद थी कि कामकाज सामान्य होते ही लंबित इंतकालों को तेजी से निपटाया जाएगा। लेकिन हड़ताल खत्म होने के बाद भी तकनीकी समस्याएं दूर नहीं हुईं। इसके चलते पेंडेंसी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। पटवारियों के सामने एक तरफ पुराने लंबित इंतकालों का दबाव है तो दूसरी तरफ सॉफ्टवेयर की गड़बड़ियों के कारण दोबारा करना पड़ रहा काम उनकी परेशानी बढ़ा रहा है।
12 दिन की हड़ताल में उठाई थीं पोर्टल की खामियां
पटवारी 20 से 31 अगस्त तक अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे थे। उनकी प्रमुख मांगों में राजस्व पोर्टल की तकनीकी खामियों को दूर करना और डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रिया में बदलाव करना शामिल था। पटवारियों का कहना था कि पोर्टल से जुड़ी दिक्कतों के कारण काम करने में परेशानी आती है और इसका खामियाजा कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों को भी भुगतना पड़ता है। इसके अलावा पटवारियों की कई अन्य मांगें भी हड़ताल का हिस्सा थीं।
इंतकाल के लिए तहसीलों के चक्कर लगा रहे लोग
जमीन की खरीद-बिक्री, विरासत और अन्य राजस्व कार्यों के लिए इंतकाल जरूरी होता है। ऐसे में इंतकाल लंबित होने से लोगों के दूसरे काम भी अटक जाते हैं। तकनीकी खामियों और बढ़ती पेंडेंसी के बीच लोग अपनी समस्या लेकर तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन और ऑटोमेटिक व्यवस्था से उन्हें राहत की उम्मीद थी, लेकिन सिस्टम की गड़बड़ी के कारण काम और ज्यादा उलझ गया है। अब जरूरत इस बात की है कि राजस्व पोर्टल की तकनीकी खामियों को जल्द दूर किया जाए, ताकि मंजूर इंतकाल डिलीट होने जैसी समस्या खत्म हो और लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सके।


