भारत में कैसे पहुंची लीची
अपने स्वाद और बनावट की वजह से लीची को फलों की रानी कहा जाता है.
भारत की लीची दुनिया भर में मशहूर है.
लेकिन क्या आप जानते हैं भारत में लीची पहुंची कैसे ?
लीची सबसे पहले दक्षिण चीन के गुआंगडॉन्ग और फुजियान प्रांत में 1059 में जंगली पौधे से बागों तक पहुंची
चीन में लीची को प्रेम का प्रतीक माना जाता है.
लीची चीन के तांग वंश के राजा जुआंग जोंग का पसंदीदा फल था
700 साल पहले तक चीन के सिवाय पूरी दुनिया को लीची की कोई जानकारी नहीं थी.
18वीं सदी की शुरुआत में फ्रांसीसी यात्री पियरे सोन्नरे ने दक्षिणी चीन की अपनी यात्रा के दौरान इस फल को चखा और इसके बाग देखे
1764 में इसे रियूनियन द्वीप में जोसेफ फ्रैंकोइस द पाल्मा द्वारा लाया गया.
फिर लीची मैडागास्कर और भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण अफ्रीका, वियतनाम, ब्राजील, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका तक पहुंची
1700 के आखिरी में लीची की खेती त्रिपुरा में शुरु हो गई थी.
इसके कुछ सालों के बाद लीची पश्चिम बंगाल, असम और बिहार तक पहुंची.