हरियाणा में अरावली का सीना चीर बनेगी दुनिया की पहली सुरंग, एक साथ चलेंगी दो-दो डबल डेकर ट्रेन

हरियाणा | PUBLISHED BY: GARIMA-TIMES | PUBLISHED ON: 06 AUG, 2022

अरावली में बनाई गई टनल

अरावली में बनाई गई टनल

गुरुग्राम। हरियाणा में फ्लाईओवर हो या 6 लेन रोड़ बिछाने का काम, सुपर तेजी से हो रहा है लेकिन उतनी ही तेजी से रेलवे लाइन बिछाने का काम भी जोरों पर है। अलग अलग रूटों पर रेल लाइनों को बिछाने का काम किया जा रहा है। इन रेल लाइनों को यात्री ट्रेनों के साथ ही मालवाहक गाड़ियों के लिए भी बिछाया जा रहा हैं। इसी कड़ी में हरियाणा दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रहा है।

गुरुग्राम में सोहना की अरावली पर्वत श्रृंखला में मालवाहक ट्रेनों के लिए एक अनोखी सुरंग बनाई गई है। इसमें एक साथ दो डबल ट्रेनें चल सकेंगी। नवंबर में इसका ट्रायल होगा। उम्मीद की जा रही है कि ट्रायल के बाद इस पर मालवाहक ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। दावे के अनुसार, यह दुनिया की पहली ऐसी सुरंग होगी, जिसमें एक साथ दो-दो डबल डेकर मालवाहक ट्रेनें गुजर सकेंगी। 

यह सुरंग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डब्ल्यूडीएफसी) का हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश के दादरी से मुंबई के जवाहर लाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल तक बनाया जा रहा है। अब तक आमतौर पर यात्री गाड़ियों के ट्रैक पर ही मालवाहक गाड़ियां दौड़ती थी, लेकिन अब इनके लिए अलग से ट्रैक बनाया जा रहा है। इसे देश की सभी प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ा गया है। वेस्टर्न और ईस्टर्न दो अलग-अलग कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं।

ईस्टर्न कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में हावड़ा के नजदीक दानाकुनी से पंजाब (लुधियाना) के साहनेवाल तक बनाया जा रहा है। नोएडा के नजदीक दादरी में दोनों कॉरिडोर का जंक्शन होगा। इन दोनों का डिजाइन तैयार करते समय इस बात का विशेष ख्याल रखा गया है कि इन्हें देश के बड़े औद्योगिक शहरों के नजदीक से निकाला जाए ताकि इन औद्योगिक शहरों में बनने वाले उत्पादों को सहजता से एक से दूसरे स्थान पर पहुंचाया जा सके। 

दोनों कॉरिडोर देश की बड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना, कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) और कुंडली-गाजियाबाद-पलवल (केजीपी) की तर्ज पर बनाए जा रहे हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) पंजाब में साहनेवाल (लुधियाना) से लेकर पश्चिम बंगाल के दनकुनी तक विकसित किया जा रहा है। यह पंजाब से होता हुआ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक जाएगा। डब्ल्यूडीएफसी उत्तर प्रदेश से हरियाणा, राजस्थान, गुजरात होते हुए महाराष्ट्र पहुंचेगा। दोनों कॉरिडोर के मिलान के लिए दादरी और खुर्जा के बीच बड़े जंक्शन का निर्माण किया जा रहा है।

इन कॉरिडोर पर मालवाहक ट्रेनें चलने के बाद यात्री ट्रेनों के ट्रैक का दबाव कम होगा और यात्री गाड़ियां समय से अपने गंतव्य तक पहुंच पाएंगी। अभी अधिकतर मालगाड़ियां उन्हीं रेल लाइनों पर चलती हैं, जिन पर यात्री ट्रेनें चलती हैं। मालगाड़ियों को गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगता है। इसी वजह से ये दोनों कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। वेस्टर्न कॉरिडोर गुरुग्राम के सोहना से नूंह, रेवाड़ी से आगे राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के कई शहरों के नजदीक से होकर गुजरेगा। लगभग 1504 किलोमीटर इस कॉरिडोर में लगभग 128 किलोमीटर हिस्सा दादरी से रेवाड़ी का है।

इस पैकेज में सोहना की अरावली में एक किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। इसकी चौड़ाई 15 मीटर और ऊंचाई 12 मीटर है। सुरंग से न केवल डबल डेकर ट्रेनें गुजर सकेंगी बल्कि एक साथ दो ट्रेनें निकलेंगी। सुरंग में ओवरहेड इलेक्ट्रिक उपकरण लगाए गए हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की लंबाई 1856 किलोमीटर होगी। इन कॉरिडोर में डेढ़ से दो किलोमीटर लंबी मालवाहक ट्रेनें चलेंगी। 

 डब्ल्यूडीएफसी अतिरिक्त मुख्य महाप्रबंधक वाईपी शर्मा के अनुसार सोहना के बीच नवंबर में ट्रायल की तैयारी है। इस पैकेज (भाग) में ही अरावली पहाड़ी क्षेत्र में एक किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई गई है। दिसंबर तक रेवाड़ी-दादरी पैकेज तैयार करने का प्रयास है। 

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