Tuesday, September 27, 2022
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20 रुपये में ट्विटर पर बिक रहा चाइल्ड पोर्न और रेप का वीडियो, इन पर आते है लाखों लाइक

नई दिल्ली। आजकल चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में नहाते समय छात्राओं के वीडियो रिकॉर्ड करने और सोशल मीडिया पर डालने के मामले पर हंगामा जोरो पर है। मामले ने इतना टूल पकड़ा है कि एक सप्ताह के लिए कॉलेज को बंद करना पड़ गया है। इधर एक नया खुलासा और हुआ है जिसे दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने उठाया है। उन्होंने एक गंभीर विषय देश के सामने रखा है।

उन्होंने दावा किया है कि 20-20 रुपये में छोटी बच्चियों और महिलाओं के रेप के वीडियो ट्विटर पर बेचे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, चाइल्ड पोर्नोग्राफी के कई वीडियो हैं, जो आसानी से ट्विटर पर उपलब्ध हैं। उनका आरोप है कि ये सब एक दो दिन से नहीं, कई महीनों और सालों से पड़े हैं। उस पर हजारों रीट्वीट और लाखों लाइक्स आ चुके हैं। ट्विटर ने न तो इसे ब्लॉक किया और न ही किसी कानून प्रवर्तन एजेंसी के समक्ष इसके बारे में रिपोर्ट दी। ऐसे में पोर्न को लेकर यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत में क्या पोर्न देखना गैरकानूनी है और इस तरह सोशल मीडिया पर पोर्न परोसने वाले को कितनी सजा हो सकती है?

स्वाति मालीवाल ने कई तस्वीरों को ब्लर करते हुए ट्वीट किया है जिससे पता चलता है कि अश्लील सामग्री खुलेआम सोशल मीडिया पर परोसी जा रही है। उन्होंने लिखा, ‘छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के वीडियो हजारों लोग शेयर कर रहे हैं। खुफ़िया कैमरे से महिलाओं की नहाते हुए वीडियो डाली जा रही है। ये कंपनी विदेश में कानूनों का पालन करती है लेकिन हिंदुस्तान में महिलाओं के साथ अश्लीलता और बलात्कार पर आंखें मूंद लेती है।’

उन्होंने बताया है कि ट्विटर इंडिया के पॉलिसी हेड और दिल्ली पुलिस को समन किया गया है। स्वाति का कहना है कि इस तरह के अश्लील वीडियो धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, ट्विटर बताए कि इसे रोकने के लिए क्या तरीका अपनाता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अमेरिका की कंपनी होने के कारण ट्विटर की जिम्मेदारी सिर्फ अमेरिकी महिलाओं और बच्चियों के प्रति है। साथ ही स्वाति ने दिल्ली पुलिस से सभी मामलों में एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित बच्चियों और महिलाओं तक मदद पहुंचाने की बात कही है।

आईपीसी और आईटी ऐक्ट के अनुसार भारत में अकेले में पोर्न देखना गैरकानूनी नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में दिए एक फैसले में पोर्न सामग्री को शेयर करने को अपराध घोषित किया है। अगस्त 2015 में केंद्र सरकार ने टेलिकम्युनिकेशन विभाग से 857 एडल्ट साइटों को बैन करने का आदेश जारी करने को कहा था। बाद में पता चला कि यह बैन अस्थायी है। सेक्शन 67ए में अश्लील सामग्रियों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रसारित करने को लेकर प्रावधान है। अगर कोई अश्लील यानी पोर्न सामग्री पब्लिश करता है या भेजता है या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्रसारित करता है तो उसे 5 साल जेल की सजा और 10 लाख रुपये का जुर्माना देना पड़ सकता है।

सेक्शन 67बी में चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर प्रावधान हैं। अपने देश में चाइल्ड पोर्नोग्राफी संबंधी सामग्री रखना, किसी को भेजना या पब्लिकेशन गैरकानूनी है। पॉक्सो ऐक्ट 2012 के सेक्शन 14 के तहत किसी भी एक बच्चे या बच्चों को पोर्नोग्राफिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल अपराध है। अगर ऐसा करता कोई पाया गया तो उसे जुर्माने के साथ ही कम से कम पांच साल की जेल हो सकती है। दोबारा दोष सिद्ध होने पर जुर्माने के साथ सात साल की सजा हो सकती है।

ऐक्ट के सेक्शन 15 में किसी भी तरह से चाइल्ड पोर्नोग्राफी को रखने या प्रसारित करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें साफ कहा गया है कि किसी भी तरह से चाइल्ड पोर्नोग्राफी को रखना, भेजना, दिखाना या बांटना, प्रसारित करना गैरकानूनी है। अगर इस तरह की अश्लील सामग्री को बेचते या रखे हुए कोई पाया जाता है तो उसे तीन से पांच साल तक की सजा हो सकती है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता ने कहा था कि पोर्नोग्राफी और सेक्शुअल क्राइम के संबंध की जांच की जाए। याची ने कहा था कि हाल में असम में एक मामले की जांच में पता चला कि छह साल की लड़की का मर्डर चार बच्चों ने किया था और ये चारों पोर्न देखने के आदी थे। इसके बाद वहां गाइडलाइंस बनाई गई कि जांच अधिकारी रेप और सेक्शुअल ऑफेंस के केस में तय की गई मानक प्रक्रियाओं का पालन करें। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया और कहा कि हर केस में एक जैसा स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर कैसे हो सकता है।

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