मुख्यमंत्री ईमानदार है तो प्रशासन भ्रष्ट क्यों ?

रोहतक। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ईमानदार है तो प्रशासन भ्रष्ट क्यों, यह आरोप है एकता मिशन की प्रदेश अध्यक्ष कांता आलाड़िया का। बुधवार को रोहतक में मीडिया से मुखातिब हुई कांता ने कहा कि पहले कांग्रेस के शासनकाल में जो कार्य 2000 रूपए में होता था अब वहीं कार्य भ्रष्टाचार के चलते 20000 रूपए में होने लगा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की ईमानदारी का भाजपा कार्यकर्ता ढिंढोरा पीटने से नहीं थकते लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर है। भाजपा सविंधान को समाप्त करने में तुली हुई है और धर्म व जाति को बढ़ावा देकर झूठ की राजनीति करने में लगी है। उन्होंने डीसी रेट, ऑउटसोर्सिंग, ठेका प्रथा और नियमित कर्मचारियों की भर्ती में हो रहे भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर भाजपा सरकार को घेरा।

कांता ने याद दिलाया कि सीएम ने रोहतक की 14 अप्रैल 2015 की जनसभा में पदोन्नति में आरक्षण नीति लागू करने, बैकलॉग पूरा करने, बीपीएल सर्वे कराने और गरीबों को 100-100 गज के प्लॉट देने की घोषणा की थी लेकिन उनमें से मुख्यमंत्री एक भी घोषणा क्रियान्वित नहीं कर पाए है फिर भी उन्हें ईमानदार कहा जा रहा है।

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मीडिया से बात करते हुए कांता आलाड़िया ने नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाते हुए कहा कि पहले शहर की सफाई का ठेका 40 लाख रूपए प्रतिमाह दिया जाता था जो बढ़कर अब साढे 4 करोड़ रूपए हो गया है। 10 जुलाई 2017 और 29 दिसंबर 2017 को उन ने आरटीआई लगाकर नगर निगम प्रशासन से जानकारी मांगी थी कि ठेके पर कितने कर्मचारी लगे है और शहर में सफाई की क्या स्थिति है। लेकिन निगम ने आज तक दोनों आरटीआई का उत्तर नहीं दिया, जिससे पता चलता है कि इसमें कितना बड़ा भ्रष्टाचार है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार केवल सफाई व्यवस्था पर लगभग एक करोड़ रूपए ही व्यय करता है बाकी 3 करोड़ रूपया नेताओं और मुख्यमंत्री कार्यालय के अफसरों की जेब में जाता है। उन्होंने केवल एक ही ठेकेदार को जींद और रोहतक की सफाई का ठेका देने पर भी सवाल उठाए। कांता आलाड़िया ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की।

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इतना ही नहीं, कांता ने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है। डीसी रेट पर लगाए गए कर्मचारियों की नियुक्ति में भी बहुत बड़ा घोटाला सामने आया है। उन्होंने कहा कि लगभग यही स्थिति पंडित भगवत दयाल शर्मा हेल्थ विवि की है। इन दोनों विश्वविद्यालय में हुए घोटालों की जांच सीबीआई से होनी चाहिए और यहीं मांग हम करते है। साथ ही उन्होंने ये भी घोषणा की कि वो सीबीआई की जांच के मुद्दे को लेकर चुप नहीं बैठेंगी और अप्रैल माह में इन्हीं मुद्दों को लेकर एक बड़ा आंदोलन छेड़ेंगी।